अपने ही जाल में फंस गया ईरान ! होर्मुज में बारूदी सुरंगें बिछा कर भूला लोकेशन, बढ़ी भारत की टेंशन
punjabkesari.in Saturday, Apr 11, 2026 - 12:43 PM (IST)
International Desk: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्चस्तरीय वार्ता के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कहा जा रहा है कि ईरान इसे पूरी तरह खोलने में सक्षम नहीं है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया युद्ध के दौरान ईरान ने जल्दबाजी में समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं। ये सुरंगें छोटी नावों के जरिए डाली गईं, लेकिन उनका सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया। कई सुरंगें ऐसी तकनीक से जुड़ी हैं जो समुद्री धाराओं के साथ अपनी जगह बदल लेती हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है। इसका मतलब है कि समुद्र में कौन-सा रास्ता सुरक्षित है और कौन-सा नहीं, यह खुद ईरान को भी पूरी तरह पता नहीं है।
यही वजह है कि वह इस अहम जलमार्ग को पूरी तरह खोलने में असमर्थ है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा था कि जलमार्ग को “तकनीकी सीमाओं” के तहत खोला जाएगा। अब यह साफ हो गया है कि यह तकनीकी समस्या दरअसल इन बारूदी सुरंगों से जुड़ी है। वहीं अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जे डी वेंस वार्ता में शामिल हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब समुद्री रास्ता पूरी तरह सुरक्षित और चालू होगा। हालांकि, ईरान ने पूरा रास्ता बंद नहीं किया है। उसने एक बहुत संकरा सुरक्षित मार्ग खुला रखा है, जिससे जहाज गुजर सकते हैं। लेकिन यह रास्ता जोखिम भरा है और इसके आसपास बारूदी सुरंगों का खतरा बना हुआ है। बताया जा रहा है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ईरान शुल्क (टोल) भी वसूल रहा है।
भारत के लिए चिंता क्यों?
भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए यह खबर चिंताजनक है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। माइनफील्ड के कारण शिपिंग और बीमा कंपनियां जोखिम लेने से बच सकती हैं। इससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई में बाधा आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें, तब भी इन समुद्री सुरंगों को हटाने में हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है।
