ईरान जंग पर खाड़ी देशों का सब्र टूटा; समझौते को लेकर ट्रंप पर उठाए सवाल, बोले-"अब बहुत हुआ..."

punjabkesari.in Sunday, Aug 16, 2026 - 04:00 PM (IST)

Dubai: ईरान के साथ युद्ध और तनाव खत्म कराने के लिए डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक कोशिश अब उन्हीं के खाड़ी सहयोगियों को जी का जंजाल लगने लगी  है। रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर समेत क्षेत्र के अमेरिकी सहयोगियों में  को चिंता है कि वॉशिंगटन की रणनीति आखिर ईरान के साथ समझौते तक कब पहुंचेगी। सबसे बड़ा पेंच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां आवाजाही अब भी बुरी तरह प्रभावित है।  अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत लंबे समय से किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंच पाई है। इसी बीच ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टालने और अपेक्षाकृत शांत रुख अपनाने की बात कही है। ट्रंप ने हाल में अपनी नीति को “लो-की” बताते हुए कहा था कि अमेरिका ईरान के साथ सिर्फ “सेमी-नेगोशिएटिंग” कर रहा है और उसके आर्थिक हालात पर नजर रख रहा है। लेकिन खाड़ी देशों के लिए समय तेजी से निकल रहा है।

 

होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई है और क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर तेल, गैस और समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गया है। यह रास्ता दुनिया के ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फिलहाल यहां से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे है। 14 अगस्त को रॉयटर्स ने बताया कि केवल कुछ ही जहाज इस रास्ते से गुजर पाए, जबकि सामान्य समय में आवाजाही काफी ज्यादा रहती है। ईरान का कहना है कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण बना रहेगा, जबकि अमेरिका पूरी तरह रास्ता खोलने पर जोर दे रहा है। यही मतभेद बातचीत को और मुश्किल बना रहा है।  दिलचस्प बात यह है कि सऊदी अरब, यूएई और दूसरे खाड़ी देशों के बीच भी ईरान से निपटने को लेकर पूरी तरह एक जैसी सोच नहीं है।

 

रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब तनाव कम करने और बातचीत को प्राथमिकता देने के पक्ष में है, जबकि यूएई में कुछ अधिकारी ईरान पर ज्यादा सैन्य दबाव बनाने की वकालत कर रहे हैं। यानी अमेरिका के सामने सिर्फ ईरान के साथ समझौते की चुनौती नहीं है, बल्कि अपने खाड़ी सहयोगियों के अलग-अलग हितों को संतुलित करने की चुनौती भी है। दरअसल, ईरान की ओर से भी अमेरिका के सामने कई मांगें रखी गई हैं। इनमें अमेरिकी सैन्य दबाव कम करना और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को पीछे हटाना जैसे मुद्दे शामिल हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरान और ओमान के बीच समुद्री मार्ग को लेकर चल रही तकनीकी बातचीत और होर्मुज को पूरी तरह खोलने का मुद्दा अलग-अलग हैं।  इसका मतलब है कि  यह जरूरी नहीं है कि सिर्फ एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग पर सहमति बन जाने से होर्मुज में सामान्य जहाजरानी तुरंत शुरू हो जाएगी,।
 

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया है कि वे खाड़ी देशों को ईरान के खिलाफ करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान अपने पड़ोसी खाड़ी देशों के साथ तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। तेहरान का यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान के लिए खाड़ी देशों के साथ संबंध मौजूदा युद्ध के बीच बेहद अहम हो गए हैं। हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप के खाड़ी देशों के नेताओं के साथ असाधारण रूप से अच्छे संबंध हैं और अमेरिका लगातार अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के संपर्क में है। यानी एक तरफ पर्दे के पीछे खाड़ी देशों की बेचैनी की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ वॉशिंगटन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि अमेरिका और उसके अरब सहयोगियों के रिश्तों में कोई बड़ी दरार नहीं आई है।
 


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Content Writer

Tanuja

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