कैमरों से किले तक: वर्षों की मेहनत बाद इजराइल ने ठोका ईरान, ऐसे ट्रैक की खामेनेई की हर मूवमेंट !
punjabkesari.in Tuesday, Mar 03, 2026 - 12:02 PM (IST)
International Desk: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद दुनिया भर में यह सवाल उठ रहा है कि अमेरिका और इजरायल ने इतना सटीक निशाना कैसे साधा? ब्रिटिश अख़बार Financial Times की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने कई वर्षों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरा सिस्टम और मोबाइल नेटवर्क में गहरी सेंध लगाई थी।
कैसे चला ऑपरेशन?
रिपोर्ट के मुताबिक यह कोई अचानक की गई कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक लंबा और योजनाबद्ध ऑपरेशन था। बताया गया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद और साइबर यूनिट Unit 8200 ने मिलकर तेहरान के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रवेश किया।
- ट्रैफिक कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की गई
- फुटेज को एन्क्रिप्ट कर बाहरी सर्वर पर भेजा गया
- मोबाइल नेटवर्क डेटा से लोकेशन ट्रैकिंग की गई
- सुरक्षा स्टाफ की दिनचर्या और मूवमेंट पैटर्न समझे गए
- धीरे-धीरे एक “Pattern of Life” तैयार किया गया — यानी रोजमर्रा की गतिविधियों का पूरा डिजिटल नक्शा।
कैमरे बने हथियार
आज शहरों में लगे CCTV सिर्फ ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नहीं हैं। अगर कोई सिस्टम में सेंध लगा ले, तो वही कैमरे निगरानी का शक्तिशाली टूल बन सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार:
- कौन कब निकला
- कौन साथ था
- किस रास्ते से मूवमेंट हुआ
- गार्ड कब बदले
- हर गतिविधि रिकॉर्ड की जाती रही।
कैसे बना एक्शन प्लान ?
जब पर्याप्त डेटा इकट्ठा हो गया, तब लोकेशन, टाइमिंग और सिक्योरिटी गैप को समझकर आगे की रणनीति बनाई गई। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल निगरानी ने इस पूरे घटनाक्रम में बड़ी भूमिका निभाई हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब युद्ध सिर्फ जमीन, समुद्र या आसमान में नहीं लड़ा जाता।साइबर नेटवर्क, कैमरा सिस्टम, मोबाइल डेटा, इंटरनेट सर्वर सब संभावित युद्धक्षेत्र बन चुके हैं। जो देश साइबर टेक्नोलॉजी में आगे हैं, वे बिना सीधे सैन्य टकराव के भी बड़ी रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकते हैं।
बड़े सवाल
- क्या शहरों के CCTV सिस्टम सुरक्षित हैं?
- क्या मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित हैं?
- क्या आने वाले समय में साइबर जासूसी आम रणनीति बन जाएगी?
- मिडिल ईस्ट में पहले से बढ़े तनाव के बीच यह मामला साफ संकेत देता है कि भविष्य की जंग “डेटा से टारगेट” तक पहुंच चुकी है।
