ईरान का अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इंकार, “अतिवादी मांगों” को ठहराया जिम्मेदार

punjabkesari.in Sunday, Apr 19, 2026 - 07:13 PM (IST)

International Desk: ईरान के उप विदेशमंत्री ने कहा है कि ईरान फिलहाल अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ सीधी बातचीत का एक नया दौर शुरू करने का इच्छुक नहीं है और इसका कारण प्रमुख मुद्दों पर वाशिंगटन का "अतिवादी" मांगों को छोड़ने से इनकार करना है। तुर्किये में एक राजनयिक मंच के कार्यक्रम से इतर ईरान के उप विदेशमंत्री सईद खतीबजादेह ने शनिवार को 'एसोसिएटेड प्रेस' को दिये साक्षात्कार में कहा कि उनका देश अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को नहीं सौंपेगा। इसी के साथ उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए दावों को खारिज कर दिया। खतीबजादेह ने कहा, "मैं आपको बता सकता हूं कि किसी भी प्रकार का संवर्धित यूरेनियम अमेरिका नहीं भेजा जाएगा। यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। हालांकि मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि हम किसी भी चिंता का समाधान करने के लिए तैयार हैं, लेकिन हम ऐसी किसी भी बात को स्वीकार नहीं करेंगे जो अस्वीकार्य हो।"

 

ट्रंप ने शुक्रवार को दावा किया था कि अमेरिका, ईरान में घुसकर "सारी परमाणु सामग्री" हासिल कर लेगा। उनका इशारा पिछले साल अमेरिकी सैन्य हमलों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए परमाणु केंद्रों में कथित तौर पर दबे 440 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम की ओर था। खतीबजादेह ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संदेशों का कई बार आदान-प्रदान हुआ है। उन्होंने लेकिन अमेरिका पर उन मांगों पर अड़े रहने का आरोप लगाया जिन्हें ईरान अतिवादी मानता है। ईरान के उप विदेशमंत्री ने कहा, ''हम अभी तक वास्तविक बैठक की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर अमेरिकियों ने अभी तक अपना अतिवादी रुख नहीं छोड़ा है।'' उन्होंने कहा कि ईरान आमने-सामने की बैठक से पहले एक ''समझौते ढांचा'' को अंतिम रूप देना चाहता है।

 

ईरानी मंत्री ने अमेरिका के साथ हुई बातचीत के विशिष्ट विवरण देने या यह बताने से इनकार कर दिया कि कौन से मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं, लेकिन उन्होंने अमेरिका से ईरान की चिंताओं को दूर करने का आह्वान किया, जिसमें ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध भी शामिल हैं। खतीबजादेह ने कहा, ''अन्य पक्षों को भी हमारी मुख्य चिंताओं को समझना और उनका समाधान करना चाहिए, जो कि ईरानियों पर अमेरिकियों द्वारा लगाए गए अवैध एकतरफा प्रतिबंध और आर्थिक आतंकवाद है। इन प्रतिबंधों को ईरानी लोगों का दम घोंटने और उन्हें ईरान के भीतर की राजनीतिक संरचना के खिलाफ विद्रोह करने के लिए लगाया गया है।'' खतीबजादेह से जब पूछा गया कि क्या ईरान युद्धविराम के बावजूद लेबनान पर इजराइल द्वारा नए सिरे से किए गए हमलों का जवाब देगा, तो उन्होंने कहा, ''ईरान के पास हमलावरों को हमेशा के लिए रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।''

 

ट्रंप ने कहा है अमेरिका ने इजराइल को लेबनान पर और हमले करने से 'रोक दिया' है और इजराइल-हिजबुल्ला युद्ध 'बहुत हो गया' है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह रोक केवल आक्रामक कार्रवाई पर लागू होती है, न कि आत्मरक्षा में की गई कार्रवाइयों पर। खतीबजादेह ने ईरान के इस रुख को दोहराया कि तेहरान की कार्रवाई रक्षात्मक थी और वार्ता के बीच हो रही अकारण आक्रामकता के जवाब में की गई थी। उन्होंने ईरान के इस रुख को भी दोहराया कि युद्धविराम लेबनान तक भी बढ़ाया जाना चाहिए, जहां इजराइल ईरान समर्थित चरमपंथी समूह हिजबुल्ला से लड़ रहा है।

 

खतीबजादेह ने कहा, ''ईरान ने सद्भावना से बातचीत की, युद्धविराम स्वीकार किया और सभी को बताया कि इस युद्धविराम में लेबनान सहित सभी देश शामिल होने चाहिए। लेकिन दूसरे पक्ष ने कहा कि वह इसके लिए प्रतिबद्ध नहीं है और फिर अत्याचार शुरू कर दिए।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक ''नयी नियमावली'' लागू की जाएगी और यह ''सभी असैन्य जहाजों के आवागमन के लिए खुला और सुरक्षित रहेगा।'' ट्रंप ने धमकी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी और अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ तो फिर से हमले किये जाएंगे। 


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Content Writer

Tanuja

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