पूर्व RAW एजेंट का सनसनीखेज खुलासाः ईरान-अमेरिका के बीच उछला पूर्व US सेना अधिकारी का नाम, म्यांमार से जुड़ा कनैक्शन
punjabkesari.in Thursday, Mar 19, 2026 - 06:52 PM (IST)
International Desk: मिडिल ईस्ट में बढ़ते ईरान-अमेरिका तनाव के बीच एक पुराना लेकिन विवादित नाम डेव यूबैंक (Dave Eubank) फिर सुर्खियों में आ गया है।Eubank, जो पहले अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस में रह चुके हैं, ने Free Burma Rangers नाम का संगठन बनाया था। यह संस्था आधिकारिक तौर पर युद्धग्रस्त इलाकों में राहत कार्य करती है जैसे घायलों का इलाज, लोगों को सुरक्षित निकालना और जरूरी मदद पहुंचाना। भारत की एलीट फोर्स NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) के पूर्व कमांडो व पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने अपने सोशल मीडिया अकाऊंट पर इस मामले पर सनसनीखेज खुलासा किया है।
Dave Eubank पहले US Special Forces में था। 1997 में उसने Free Burma Rangers नाम का एक ग्रुप बनाया। ऊपर से ये एक humanitarian organization है, जो म्यांमार के war zones में जाकर घायलों का इलाज करता है, फंसे लोगों को निकालता है और खाने पीने व दवाइयों की मदद देता है।
— Lucky Bisht (@iamluckybisht) March 19, 2026
लेकिन ग्राउंड… pic.twitter.com/BSeMRltgIa
म्यांमार कनेक्शन क्यों चर्चा में?
Myanmar में लंबे समय से सेना और एथनिक ग्रुप्स के बीच संघर्ष चल रहा है। Eubank का संगठन इन्हीं इलाकों में सक्रिय रहा है, जहां वह सीधे जमीनी स्तर पर काम करता है।हालांकि, यही बात विवाद की वजह भी बनी है। म्यांमार सरकार और कुछ विश्लेषकों का आरोप है कि यह संगठन केवल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्रोही इलाकों में रहकर अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें सहयोग भी देता है।
ईरान-अमेरिका जंग से क्या लिंक?
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में युद्ध सिर्फ सैन्य नहीं रह गया है। कई गैर-सरकारी संगठन (NGOs), पूर्व सैनिक और “ह्यूमैनिटेरियन नेटवर्क” का रोल भी संघर्ष क्षेत्रों में अहम होता जा रहा है।ऐसे में Dave Eubank जैसे लोगों की गतिविधियों पर नजर बढ़ जाती है, खासकर जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका की सैन्य और रणनीतिक भूमिका सवालों में हो। Eubank के सैन्य बैकग्राउंड के कारण कई पूर्व सैनिक और विदेशी लोग इस मिशन से जुड़ते रहे हैं।कुछ लोग मानवाधिकार के नाम पर आते हैं, कुछ “ग्राउंड एक्सपीरियंस” लेने के लिए यही कारण है कि आलोचक इसे सिर्फ NGO नहीं, बल्कि “ग्रे-ज़ोन एक्टिविटी” मानते हैं, जहां मानवता और रणनीति के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। समर्थकों की नजर में यह संगठन जान बचा रहा है, जहां कोई और नहीं पहुंचता वहांं ये संगठन पहुंत रहा हा। जबकि आलोचको का मानना है कि यह विद्रोही क्षेत्रों में जाकर संघर्ष को प्रभावित कर सकता है।
