चीन में घरेलू काम के बदले पत्नी को मिला 7,700 डॉलर मुआवजा, सोशल मीडिया पर मच गया बवाल

2021-02-24T17:44:49.637

बीजिंगः चीन में नए सिविल कोड के तहत आए पहले फैसले से सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है।  नए सिविल कोड (नागरिक संहिता)  के तहत यहां तलाक की अर्जी पर आए इस फैसले में अदालत ने पति को  पत्नी ने जो घरेलू कार्य किए, उसके बदले  से 7,700 डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस केस के बारे में  चाइना वूमन्स न्यूज में रिपोर्ट छपने के बाद नई बहस छिड़ गई  है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक वांग उपनाम की एक महिला ने पिछले साल अपने पति से तलाक के लिए अर्जी दी थी। उसने कहा था कि उसका पति घरेलू कामकाज में हिस्सा नहीं बंटाता और वह उसकी देखभाल नहीं करता है। साथ ही वह रोज उसे बच्चों की देखभाल के लिए उसे घर पर छोड़ कर अपने काम पर चला जाता है। बीजिंग  की अदालत ने इस मामले में फैसला पत्नी के हक में सुनाते हुए  पति को आदेश दिया कि घरेलू कार्यों की उपेक्षा करने के एवज में वह पत्नी को 50 हजार युवान (7,700 डॉलर) का भुगतान करेगा।

 

इस केस का फैसला देने वाली बेंच के प्रमुख जज फेंग मिआओ ने बीते सोमवार को मीडिया को फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शादी टूटने के बाद दंपति की जायदाद का विभाजन करते वक्त ठोस संपत्तियों को ध्यान में रखा जाता है। घरेलू कार्य ऐसी संपत्ति है जिसका भी मूल्य होता है, लेकिन जिसकी गणना ठोस संपत्तियों में नहीं होती। चीन में पिछले एक जनवरी से लागू हुए नए सिविल कोड के मुताबिक अगर किसी दंपति के बीच कोई सदस्य बच्चों के पालन-पोषण, बुजुर्गों की देखभाल, घरेलू कार्य आदि में ज्यादा जिम्मेदारियां निभाता है  तो वह तलाक के समय अपने पार्टनर से मुआवजा मांगने का अधिकारी है। लेकिन ऐसे मुआवजे का दावा वही तभी कर पाएगा  जब विवाह के वक्त दोनों ने इससे संबंधित करार पर दस्तखत किए हों लेकिन चीन में पारंपरिक रूप से ऐसा करार होने की प्रथा नहीं है।

 

फैसले की जानकारी आने के बाद चीन की ऑनलाइन मीडिया पर इसको लेकर तीखी बहस चल रही है। कई लोगों ने इस निर्णय को सकारात्मक बताया है। लेकिन कुछ लोगों ने कहा है कि चीन में गृहणियों को घरेलू कामकाज का जितना बोझ उठाना पड़ता है  उसे देखते हु मुआवजे की  रकम  बहुत कम है। एक वेबसाइट के कराए सर्वेक्षण में चार लाख लोगों ने भाग लिया। उनमें से 93 फीसदी ने राय जताई कि 50 हजार युवान मुआवजे के रूप में रकम बहुत कम है। ये मांग भी उठी है कि पहले से करार होने पर भी किसी पीड़ित पार्टनर को मुआवजा मांगने का हक होना चाहिए।

  


Content Writer

Tanuja

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