चाड आर्मी बेस कैंप पर बोको हरम आतंकियों का रात में हमला, 25 जवान शहीद, 46 घायल - खौफनाक वीडियो आया सामने
punjabkesari.in Wednesday, May 06, 2026 - 08:54 AM (IST)
Boko Haram attack Chad army base: उत्तर-मध्य अफ्रीका में स्थित चाड के लेक चाड इलाके में स्थित एक आर्मी बेस कैंप पर संदिग्ध बोको हरम आतंकियों ने रात के समय हमला कर दिया, जिसमें कम से कम 25 सैनिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह हमला सोमवार देर रात बर्का टोलोरोम नाम के सैन्य ठिकाने पर हुआ, जो लेक चाड के किनारे स्थित है।
लेक चाड एक बड़ा जल क्षेत्र है जो कैमरून, चाड, नाइजर और नाइजीरिया की सीमाओं से जुड़ा हुआ है। इस इलाके के कई द्वीप और दलदली हिस्से लंबे समय से बोको हरम और अन्य आतंकी समूहों के छिपने के ठिकाने बने हुए हैं।
सैन्य सूत्रों के अनुसार इस हमले में 25 सैनिकों की मौत हुई और 46 घायल हुए हैं, जबकि एक स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी ने 24 मौतों की पुष्टि की है। दोनों अधिकारियों ने इस हमले के पीछे बोको हराम का हाथ बताया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि अब स्थिति कंट्रोल में है।
🚨|Urgent | 🚨#Tchad
— 𝐙𝐚𝐤𝐚𝐫𝐢𝐚 𝐇𝐚𝐫𝐚𝐧𝐞🇷🇴 (@SalehDjerni) May 5, 2026
La secte Boko haram a attaqué une base de l'armée tchadienne à Barka Toloroum, dans la province du lac-Tchad faisant plusieurs morts et des nombreux blessés. pic.twitter.com/WFBrlGwCuW
राष्ट्रपति ने की हमले की कड़ी निंदा
चाड के राष्ट्रपति महमत इदरीस डेबी इतनो ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया। उन्होंने शहीद सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और तेज की जाएगी जब तक इस खतरे को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता।
पिछले कुछ समय से लेक चाड क्षेत्र में बोको हरम के हमले बढ़ गए हैं। इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी एक बड़े हमले में लगभग 40 चाड सैनिक मारे गए थे। इसके बाद राष्ट्रपति डेबी ने खुद मोर्चा संभालते हुए एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया था, जो फरवरी 2025 तक चला। उस समय सेना ने दावा किया था कि चाड में बोको हराम का कोई ठिकाना नहीं बचा है।
लेकिन हाल के महीनों में बोको हराम के जेएएस गुट द्वारा फिर से हमले तेज हुए हैं। खासकर द्वीपों और नाइजर के किनारों पर सैनिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में बोको हराम के एक अन्य गुट इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) की भी मौजूदगी बनी हुई है, जिससे सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ गई हैं।
