Laalo: Krishna Sada Sahaayat Review: आस्था और आत्म-खोज की सरल कहानी

punjabkesari.in Friday, Jan 09, 2026 - 05:53 PM (IST)

फिल्म: लालो: कृष्ण सदा सहायेते (Laalo: Krishna Sada Sahaayat)
स्टारकास्ट: करन जोशी (Karan Joshi),  रीवा राछ (Reeva Rachh), श्रुहद गोस्वामी (Shruhad Goswami), कदेचा मिष्टी (Kadecha Mishty)
डायरेक्टर: अंकित सखिया (Ankit Sakhiya )

रेटिंग: 3*

लालो: कृष्ण सदा सहायेते: गुजराती सिनेमा में आमतौर पर हल्की-फुल्की कॉमेडी और पारिवारिक मनोरंजन देखने को मिलता है लेकिन निर्देशक अंकित सखिया की फिल्म ‘लालो: कृष्ण सदा सहायेते’ इस पारंपरिक ढर्रे से हटकर एक गहरी, भावनात्मक और प्रेरणादायक कहानी पेश करती है। यह फिल्म भक्ति, परिवार और जीवन में सही रास्ता चुनने की अहमियत को बेहद सादगी और संवेदनशीलता के साथ दर्शाती है।

कहानी
फिल्म की कहानी लालजी (करन जोशी) के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक साधारण रिक्शा चालक है और गरीबी, कर्ज तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा हुआ है। हालात उसे ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देते हैं जो न सिर्फ गलत साबित होते हैं बल्कि उसका सीधा असर उसकी मासूम बेटी और पारिवारिक रिश्तों पर भी पड़ता है। फिल्म बहुत सहज तरीके से दिखाती है कि माता-पिता के तनाव और झगड़े बच्चों के मन पर कितना गहरा प्रभाव डालते हैं। अपनी गलतियों के बाद लालजी की जिंदगी एक ऐसे मोड़ पर पहुंचती है, जहां उसे भगवान कृष्ण (श्रुहद गोस्वामी) का मार्गदर्शन मिलता है। कृष्ण उसे सही और गलत का फर्क समझाते हैं और जीवन को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा देते हैं।

एक्टिंग
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका दमदार अभिनय है। करन जोशी ने लालजी के किरदार में दर्द, मजबूरी, गुस्सा और पश्चाताप को बेहद सच्चाई से निभाया है जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ देता है। श्रुहद गोस्वामी भगवान कृष्ण के रूप में शांत, संयमित और प्रभावशाली नजर आते हैं। उनकी संवाद अदायगी और मुस्कान फिल्म में सकारात्मक ऊर्जा भर देती है। रीवा राछ ने एक समझदार और सहनशील पत्नी की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाया है, वहीं छोटी मिष्टी अपने मासूम अभिनय से बच्चों की भावनाओं को दिल तक पहुंचाने में सफल रहती है।

डायरेक्शन
निर्देशक अंकित सखिया ने फिल्म को बहुत सरल लेकिन असरदार अंदाज में प्रस्तुत किया है। उन्होंने बिना उपदेशात्मक हुए जीवन के गहरे संदेश को कहानी के साथ खूबसूरती से पिरोया है। फिल्म यह सिखाती है कि जब इंसान पूरी तरह टूट जाता है और उसे कोई रास्ता नजर नहीं आता, तब ईश्वर पर भरोसा और सही फैसले उसे आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। कुल मिलाकर, ‘लालो: कृष्ण सदा सहायेते’ एक सच्ची, भावनात्मक और प्रेरणादायक पारिवारिक फिल्म है, जिसे हर उम्र के लोग साथ बैठकर देख सकते हैं। यह न सिर्फ मनोरंजन करती है, बल्कि जिंदगी को बेहतर तरीके से जीने की सीख भी देती है।


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Content Editor

Manisha

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