Pyre Movie Review: पहाड़ों में बुजुर्ग दंपती के प्यार और इंतजार की भावुक कहानी
punjabkesari.in Tuesday, Oct 27, 2026 - 02:59 PM (IST)
फिल्म: पायरे (Pyre)
कलाकार: पदम सिंह कापरी (Padam Singh Kapri), हीरा देवी (Heera Devi), सुभाष चंद्र (Subhash Chandra) और शुभम चौधरी (Shubham Chaudhary)
निर्देशक: विनोद कापरी (vinod kapri)
रेटिंग: 3.5/5
Pyre: कुछ फिल्में मनोरंजन से आगे बढ़कर जिंदगी की उन सच्चाइयों से रूबरू कराती हैं, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं। विनोद कापरी की फिल्म ‘पायरे’ भी ऐसी ही कहानी है, जो उत्तराखंड के पहाड़ों में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति के जरिए अकेलेपन, पलायन और बुढ़ापे की मुश्किलों को सामने लाती है। फिल्म में न बड़े-बड़े ड्रामे हैं और न ही बनावटी भावनाएं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी के छोटे-छोटे पल हैं, जो धीरे-धीरे दिल पर असर छोड़ते हैं।
कहानी
‘पायरे’ की कहानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के एक दूरदराज गांव में रहने वाले पदम सिंह और उनकी बीमार पत्नी तुलसी के इर्द-गिर्द घूमती है। उनका बेटा कई साल पहले रोजगार की तलाश में मुंबई चला गया था और लंबे समय से उसका कोई अता-पता नहीं है। उम्र और बीमारी के कारण दोनों को दूसरों की मदद की जरूरत पड़ती है, लेकिन पहाड़ों में बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचना भी उनके लिए आसान नहीं है।
इसी बीच एक दिन डाकिया उनके बेटे की वापसी की खबर लेकर आता है। इस चिट्ठी से बुजुर्ग दंपति के जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जागती है। वे बेटे के आने का इंतजार करने लगते हैं, लेकिन उसकी वापसी उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं होती। इसके बाद कहानी ऐसा मोड़ लेती है, जो रिश्तों, उम्मीदों और बुढ़ापे की सच्चाई को बेहद भावुक तरीके से सामने रखता है।

निर्देशन
विनोद कापरी ने फिल्म को बेहद सहज और वास्तविक अंदाज में पेश किया है। उन्होंने पहाड़ों की खूबसूरती के साथ वहां रहने वाले लोगों की परेशानियों को भी बखूबी दिखाया है। फिल्म की धीमी रफ्तार और शांत माहौल कहानी के अकेलेपन को महसूस कराने में मदद करते हैं। हालांकि, इसकी गति कुछ दर्शकों को सुस्त लग सकती है, लेकिन कहानी का भावनात्मक असर धीरे-धीरे गहराता जाता है।
फिल्म की एक खास बात यह है कि यह बुजुर्गों की जिंदगी को सिर्फ दुख के नजरिए से नहीं दिखाती। पदम सिंह और तुलसी के बीच होने वाली नोकझोंक, एक-दूसरे को चिढ़ाना और मुश्किल समय में साथ खड़े रहना उनके रिश्ते को बेहद स्वाभाविक बनाता है। पहाड़ों के दृश्य और संगीत भी कहानी के भावनात्मक माहौल को मजबूत करते हैं।
अभिनय
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत पदम सिंह कापरी और हीरा देवी का अभिनय है। दोनों पहली बार कैमरे के सामने आए हैं, लेकिन उनकी अदाकारी में कहीं भी बनावट महसूस नहीं होती। वे अपने किरदारों को इतनी सहजता से निभाते हैं कि कई बार लगता है जैसे पर्दे पर किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि असल जिंदगी चल रही हो।
पदम सिंह के चेहरे पर बेटे के इंतजार और उम्र की थकान साफ नजर आती है, वहीं हीरा देवी तुलसी के किरदार में दर्द, जिद और उम्मीद को खूबसूरती से पेश करती हैं। दोनों के बीच की छोटी-छोटी तकरार फिल्म में हल्के पल भी लाती है और उनके रिश्ते की गहराई को भी दिखाती है। सुभाष चंद्र और शुभम चौधरी ने भी अपनी भूमिकाओं के जरिए कहानी को जरूरी सहारा दिया है।
अगर आपको वास्तविक किरदारों और संवेदनशील कहानियों वाली फिल्में पसंद हैं, तो ‘पायरे’ आपको जरूर प्रभावित कर सकती है। इसकी सादगी और दोनों मुख्य कलाकारों का स्वाभाविक अभिनय लंबे समय तक याद रहता है।
