Sumo Didi Review: बॉडी शेमिंग से लेकर देश के लिए मेडल जीतने तक, सच्ची कहानी है फिल्म की ताकत

punjabkesari.in Friday, Oct 23, 2026 - 10:30 AM (IST)

फिल्म- सुमो दीदी (Sumo Didi)
स्टारकास्ट- श्रीयम भगनानी (Shriyam Bhagnani), चैतन्य शर्मा (Chaitnya Sharma), नितेश पाण्डेय (Nitesh Pandey), अनुभा फतेहपुरिया (Anubha Fatehpuria)
डायरेक्टर- जयंत रोहतगी (Jayant Rohatgi)
प्लेटफॉर्म- जी5 (Zee5)
रेटिंग- 3*

Sumo Didi: हमारे देश में आज भी मोटी लड़कियों को बॉडी शेमिंग का सामना करना पड़ता है। अक्सर उनके मन में यह सवाल उठाया जाता है कि उनसे कौन शादी करेगा या वे अपनी जिंदगी में कैसे आगे बढ़ेंगी। लेकिन कुछ लड़कियां ऐसी भी होती हैं, जो अपने मोटापे को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लेती हैं और दुनिया की सोच को गलत साबित कर देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक सच्ची कहानी लेकर आ रहे हैं जयंत रहतोगी। भारत में सुमो रेसलिंग के बारे में लोग जानते तो हैं लेकिन इसे अपनाने का साहस बहुत कम लोग ही जुटा पाते हैं। यह कहानी है देश की पहली महिला सुमो रेसलर हेतल दवे की जिन्होंने अपने शरीर को अपनी ताकत बनाया, रेसलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल भी जीता।


कहानी
फिल्म ‘सुमो दीदी’ की कहानी कोलकाता की रहने वाली हेतल दवे के इर्द-गिर्द घूमती है जो जूडो की खिलाड़ी होती हैं। हेतल पीसीओडी की समस्या से जूझ रही होती हैं जिसके कारण उनका वजन काफी बढ़ जाता है। इस वजह से उन्हें समाज के ताने सुनने पड़ते हैं। यहां तक कि उनकी मां भी उन्हें कई चीजें करने से रोकती हैं, क्योंकि उन्हें भी समाज की सोच और लोगों की बातों की चिंता होती है। लेकिन जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जब हेतल सुमो रेसलर बनने का सपना देखती हैं और उसे पूरा करने के लिए जी-जान से मेहनत करती हैं। तमाम मुश्किलों और लोगों की आलोचनाओं का सामना करते हुए वह अपनी पहचान बनाती हैं और देश के लिए कांस्य पदक जीतकर लाती हैं। फिल्म यह खूबसूरत संदेश देती है कि सफलता सिर्फ मेडल के रंग से नहीं मापी जाती, बल्कि असली जीत तब होती है, जब इंसान अपनी कमजोरी समझी जाने वाली चीज को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेता है।

एक्टिंग
फिल्म ‘सुमो दीदी’ में श्रीयम भगनानी, चैतन्य शर्मा, नितेश पांडे और अनुभा फतेहपुरिया मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। श्रीयम भगनानी ने हेतल दवे के किरदार को बेहद सहज और वास्तविक अंदाज में निभाया है। उन्होंने किरदार की भावनाओं, संघर्ष और मेहनत को पर्दे पर उतारने की अच्छी कोशिश की है। वहीं, चैतन्य शर्मा ने अक्षत के किरदार में अपनी छाप छोड़ी है और अपने अभिनय से कहानी को मजबूती दी है। इसके अलावा, नितेश पांडे और अनुभा फतेहपुरिया ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। 

डायरेक्शन
फिल्म ‘सुमो दीदी’ का निर्देशन जयंत रोहतगी ने किया है। यह फिल्म कोलकाता की हेतल दवे की प्रेरणादायक कहानी पर आधारित है जिन्हें भारत की पहली महिला सुमो रेसलर के रूप में जाना जाता है। जयंत रोहतगी ने कहानी को पर्दे पर उतारने की अच्छी कोशिश की है। फिल्म के कई दृश्य वास्तविकता के करीब लगते हैं जिससे हेतल के संघर्ष, मेहनत और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को समझने में मदद मिलती है। निर्देशक ने बॉडी शेमिंग और समाज की रूढ़िवादी सोच जैसे मुद्दों को भी कहानी का हिस्सा बनाया है, जो फिल्म को एक अलग पहचान देते हैं। वहीं, सुमो रेसलिंग के दृश्यों को भी इस तरह पेश किया गया है कि दर्शक हेतल के जुनून और आत्मविश्वास को महसूस कर सकें। कुल मिलाकर, जयंत रोहतगी का निर्देशन फिल्म के प्रेरणादायक संदेश को प्रभावी ढंग से सामने लाता है और दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि किसी की काबिलियत को उसके शरीर के आकार से नहीं आंकना चाहिए।

 


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Content Editor

Manisha

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