Jhaad Phoonk Review: रहस्यमयी हवेली, खौफनाक राज और सस्पेंस का जबरदस्त डोज, कैसी है फिल्म?
punjabkesari.in Friday, Oct 30, 2026 - 11:18 AM (IST)
फिल्म: झाड़-फूंक (Jhaad Phoonk)
कलाकार: यशपाल शर्मा (yashpal Sharma), पद्मिनी कोल्हापुरे (Padmini Kolhapure), सुम्बुल तौकीर (Sumbul Touqeer), हर्ष राजपूत (Harsh Rajput), अप्रतिम सिंह (Apratim Singh)
निर्देशक: राजन रामगोपाल वर्मा (Rajan Ramgopal Verma)
प्लेटफॉर्म: हॉटस्टार (Hotstar)
रेटिंग: 3.5*
Jhad Phoonk: हॉरर फिल्मों में डरावने दृश्य, रहस्यमयी जगहें और अचानक सामने आने वाले ट्विस्ट दर्शकों को रोमांचित करते हैं। निर्देशक राजन रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘झाड़-फूंक’ भी कुछ इसी तरह के डर और रहस्य की दुनिया में ले जाती है। फिल्म की कहानी एक प्रेमी जोड़े से शुरू होती है, लेकिन जल्द ही उनका सफर खौफनाक मोड़ ले लेता है। यह फिल्म आज यानी 30 अक्टूबर को हॉटस्टार पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म में सुम्बुल तौकीर खान, यशपाल शर्मा, पद्मिनी कोल्हापुरे और हर्ष राजपूत अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कैसी है ‘झाड़-फूंक’।

कहानी
फिल्म की कहानी उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियों से शुरू होती है जहां आस्था (सुम्बुल तौकीर) और राजवीर (हर्ष राजपूत) कार से दिल्ली जा रहे होते हैं। आस्था गर्भवती है और चाहती है कि राजवीर जल्द उससे शादी करके उनके रिश्ते को एक नाम दे। दोनों के बीच प्यार और तकरार का सिलसिला चल रहा होता है, तभी रास्ते में उन्हें भटकने का एहसास होने लगता है। इसी दौरान एक भीषण सड़क दुर्घटना होती है, जिसके बाद राजवीर अचानक गायब हो जाता है। परेशान आस्था को घने जंगल के बीच बनी एक सुनसान हवेली में शरण मिलती है, जहां मोहन ठाकुर (यशपाल शर्मा) और कामिनी ठाकुर (पद्मिनी कोल्हापुरे) रहते हैं। शुरुआत में दोनों उसकी मदद करते नजर आते हैं, लेकिन जल्द ही आस्था को महसूस होने लगता है कि हवेली में सब कुछ सामान्य नहीं है। मंजरी नाम की रहस्यमयी शक्ति उसे परेशान करने लगती है और आसपास होने वाली अजीब घटनाएं डर का माहौल पैदा करती हैं। धीरे-धीरे हवेली में छिपे राज सामने आने लगते हैं और मोहन व कामिनी के रहस्यमयी व्यक्तित्व कहानी को नए मोड़ देते हैं। अब कहानी में आगे क्या होगा यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

एक्टिंग
अभिनय की बात करें तो सुम्बुल तौकीर आस्था के किरदार में कहानी का केंद्र बनी रहती हैं। गर्भावस्था, प्रेमी के अचानक गायब होने का सदमा और अनजान जगह पर फंस जाने की बेबसी जैसे भावों को उन्होंने अपने अभिनय में उतारने की अच्छी कोशिश की है। यशपाल शर्मा मोहन ठाकुर के किरदार में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराते हैं। उनके हावभाव और रहस्यमयी अंदाज से यह समझ पाना मुश्किल रहता है कि उनके मन में आखिर क्या चल रहा है। वहीं, पद्मिनी कोल्हापुरे कामिनी ठाकुर के रूप में प्रभावित करती हैं। उनके किरदार में रहस्य के साथ भावनात्मक पहलू भी देखने को मिलता है और कहानी के अंतिम हिस्से में उनसे जुड़ा मोड़ घटनाओं को एक नया नजरिया देता है। हर्ष राजपूत राजवीर के किरदार में सहज और आत्मविश्वास से भरे नजर आते हैं। वहीं, मोक्ष ठाकुर की भूमिका में अप्रतिम सिंह भी अपनी भूमिका के अनुरूप नजर आते हैं।

डायरेक्शन
निर्देशक राजन रामगोपाल वर्मा ने ‘झाड़-फूंक’ में क्लासिक हॉरर फिल्मों की शैली अपनाई है, जहां सीमित किरदारों, सुनसान लोकेशन और खामोशी के जरिए डर का माहौल तैयार किया जाता है। घने जंगल के बीच बनी हवेली फिल्म की सबसे खास लोकेशन है, जिसका सन्नाटा और रहस्यमयी माहौल कहानी के रोमांच को बढ़ाता है। फिल्म में डर और सस्पेंस को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है। खासतौर पर इसका प्रीक्लाइमेक्स काफी प्रभावशाली है, जहां घटनाएं तेजी से करवट लेती हैं और दर्शकों के अनुमान बदलने लगते हैं। आस्था, विश्वास और अंधविश्वास के बीच का द्वंद्व भी कहानी को एक अलग आयाम देता है। हालांकि, कुछ जगहों पर कहानी की रफ्तार और घटनाओं का विस्तार थोड़ा और बेहतर हो सकता था, लेकिन रहस्यमयी किरदार और चौंकाने वाले मोड़ फिल्म को अंत तक देखने लायक बनाते हैं। कुल मिलाकर, हॉरर और सुपरनैचुरल थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘झाड़-फूंक’ एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
