Yamuna Shashthi 2025: धन की वृद्धि के लिए यमुना षष्ठी पर करें इस विशेष स्त्रोत का पाठ
punjabkesari.in Thursday, Apr 03, 2025 - 10:50 AM (IST)

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Yamuna Shashthi 2025: पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन यमुना षष्ठी मनाई जाती है और यह पर्व आज 3 अप्रैल को मनाया जा रहा है। आज का यह दिन मां यमुना की पूजा के लिए समर्पित होता है। यमुना नदी, जो भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण है, देवी यमुना के रूप में पूजी जाती है। यमुना षष्ठी के दिन श्रद्धालु विशेष रूप से यमुना मां की पूजा करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत, स्नान और मंत्रों का जाप करते हैं। इस दिन को धन, वैभव, सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यमुना षष्ठी पर यमुना षष्ठी स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में अनेक शुभ फलों की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र मां यमुना की महिमा का गान करता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। कहा जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से धन-वैभव में वृद्धि होती है और जीवन में समृद्धि आती है। इस लेख में हम यमुना षष्ठी स्तोत्र के महत्व, इसके पाठ के लाभ और इस स्तोत्र के पाठ की विधि के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
यमुना स्तोत्र का पाठ
नमामि यमुनामहं सकल सिद्धि हेतुं मुदा, मुरारि पद पंकज स्फ़ुरदमन्द रेणुत्कटाम ।
तटस्थ नव कानन प्रकटमोद पुष्पाम्बुना, सुरासुरसुपूजित स्मरपितुः श्रियं बिभ्रतीम ।
कलिन्द गिरि मस्तके पतदमन्दपूरोज्ज्वला, विलासगमनोल्लसत्प्रकटगण्ड्शैलोन्न्ता ।
सघोषगति दन्तुरा समधिरूढदोलोत्तमा, मुकुन्दरतिवर्द्धिनी जयति पद्मबन्धोः सुता ।।
भुवं भुवनपावनी मधिगतामनेकस्वनैः, प्रियाभिरिव सेवितां शुकमयूरहंसादिभिः ।
तरंगभुजकंकण प्रकटमुक्तिकावालूका, नितन्बतटसुन्दरीं नमत कृष्ण्तुर्यप्रियाम ।।
अनन्तगुण भूषिते शिवविरंचिदेवस्तुते, घनाघननिभे सदा ध्रुवपराशराभीष्टदे ।
विशुद्ध मथुरातटे सकलगोपगोपीवृते, कृपाजलधिसंश्रिते मम मनः सुखं भावय ।।
यया चरणपद्मजा मुररिपोः प्रियं भावुका, समागमनतो भवत्सकलसिद्धिदा सेवताम ।
तया सह्शतामियात्कमलजा सपत्नीवय, हरिप्रियकलिन्दया मनसि मे सदा स्थीयताम ।।
नमोस्तु यमुने सदा तव चरित्र मत्यद्भुतं, न जातु यमयातना भवति ते पयः पानतः ।
यमोपि भगिनीसुतान कथमुहन्ति दुष्टानपि, प्रियो भवति सेवनात्तव हरेर्यथा गोपिकाः ।।
ममास्तु तव सन्निधौ तनुनवत्वमेतावता, न दुर्लभतमारतिर्मुररिपौ मुकुन्दप्रिये ।
अतोस्तु तव लालना सुरधुनी परं सुंगमा, त्तवैव भुवि कीर्तिता न तु कदापि पुष्टिस्थितैः ।।
स्तुति तव करोति कः कमलजासपत्नि प्रिये, हरेर्यदनुसेवया भवति सौख्यमामोक्षतः ।
इयं तव कथाधिका सकल गोपिका संगम, स्मरश्रमजलाणुभिः सकल गात्रजैः संगमः ।।
तवाष्टकमिदं मुदा पठति सूरसूते सदा, समस्तदुरितक्षयो भवति वै मुकुन्दे रतिः ।
तया सकलसिद्धयो मुररिपुश्च सन्तुष्यति, स्वभावविजयो भवेत वदति वल्लभः श्री हरेः ।।
।। इति श्री वल्लभाचार्य विरचितं यमुनाष्टकं सम्पूर्णम ।।
यमुना षष्ठी स्तोत्र का महत्व
धन और वैभव में वृद्धि: यमुना षष्ठी स्तोत्र का नियमित पाठ करने से जीवन में धन की कमी दूर होती है और व्यक्ति को आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से व्यापारियों और व्यवसायियों के लिए लाभकारी माना जाता है क्योंकि इससे उनके व्यापार में वृद्धि होती है और वित्तीय संकट दूर होते हैं।
रोग और दुःखों का नाश: यमुना मां के आशीर्वाद से व्यक्ति के सभी रोगों और मानसिक समस्याओं का नाश होता है। यह स्तोत्र स्वास्थ्य लाभ के लिए भी अत्यंत प्रभावी माना जाता है, और यह शरीर को ताजगी और ऊर्जा प्रदान करता है।
दुश्चक्रों से मुक्ति: यदि किसी व्यक्ति को जीवन में निरंतर बाधाएं आ रही हैं, तो यमुना षष्ठी स्तोत्र का पाठ उन बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। यह स्तोत्र शारीरिक, मानसिक और भौतिक रूप से व्यक्ति को शांति और समृद्धि प्रदान करता है।
मानसिक शांति और संतुलन: यमुना स्तोत्र का पाठ मानसिक शांति के लिए भी बहुत लाभकारी है। यह व्यक्ति के मन को शांत करता है और उसे आत्मविश्वास से भरपूर बनाता है। इससे जीवन के तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है।