Yamuna Jayanti 2026: क्या सच में यमुना थीं भगवान कृष्ण की पत्नी? जानें पूरी पौराणिक कथा
punjabkesari.in Tuesday, Mar 24, 2026 - 08:34 AM (IST)
Yamuna Jayanti 2026: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाने वाली यमुना जयंती या यमुना छठ हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। यह पर्व देवी यमुना के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष यमुना जयंती 24 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहां श्रद्धालु यमुना नदी में स्नान और दीपदान करते हैं।

कब है यमुना जयंती 2026?
तारीख: 24 मार्च 2026
षष्ठी तिथि प्रारंभ: 23 मार्च शाम 06:38 बजे
षष्ठी तिथि समाप्त: 24 मार्च शाम 04:07 बजे
उदया तिथि के अनुसार यह पर्व 24 मार्च को ही मनाया जाएगा।
क्यों मनाई जाती है यमुना जयंती?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र शुक्ल षष्ठी के दिन ही देवी यमुना का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। यमुना को सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन माना जाता है। इस दिन यमुना स्नान और पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

क्या यमुना थीं भगवान कृष्ण की पत्नी?
यह प्रश्न अक्सर श्रद्धालुओं के मन में उठता है कि क्या देवी यमुना, भगवान कृष्ण की पत्नी थीं?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यमुना माता ने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि द्वापर युग में वे कृष्ण अवतार में उन्हें प्राप्त करेंगे।
कथा के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण वन में विचरण कर रहे थे, तब उनकी भेंट यमुना जी से हुई। यमुना जी की तपस्या और इच्छा को जानकर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने स्वरूप का परिचय दिया और बाद में उनसे विवाह किया।
इस प्रकार कुछ पौराणिक मान्यताओं में यमुना जी को भगवान कृष्ण की पत्नी के रूप में भी स्वीकार किया जाता है।

ब्रज में उत्सव का विशेष महत्व
यमुना जयंती के दिन मथुरा और वृंदावन में भव्य आयोजन होते हैं—
यमुना तट पर स्नान और दीपदान।
मंदिरों में विशेष पूजा और भजन-कीर्तन।
घाटों पर आकर्षक आरती।
इस दिन चैती छठ का पर्व भी आसपास के समय में पड़ता है, जिससे इस उत्सव का महत्व और बढ़ जाता है।
Yamuna Jayanti 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और पौराणिक कथाओं से जुड़ा एक विशेष अवसर है। देवी यमुना की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है, वहीं भगवान भगवान कृष्ण से जुड़ी उनकी कथा इस पर्व को और भी खास बना देती है।

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