Navratri Lakshmi Prapti Upay 2026: महर्षि भृगु द्वारा बताए गए इस विशेष श्री यंत्र से करें लक्ष्मी प्राप्ति और धन स्थिर करने का अचूक उपाय

punjabkesari.in Friday, Mar 20, 2026 - 03:01 PM (IST)

Navratri Lakshmi Prapti Upay 2026: हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में धन, वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी की आराधना को सर्वोपरि माना गया है। विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में किए गए उपाय कई गुना अधिक फलदायी माने जाते हैं। इसी क्रम में महर्षि भृगु द्वारा बताया गया यह विशेष श्री यंत्र उपाय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है, जो न केवल धन की प्राप्ति कराता है बल्कि लक्ष्मी को स्थिर भी करता है।

24 मार्च 2026, मंगलवार के शुभ मुहूर्त में इस यंत्र का निर्माण करके विधि-विधान से स्थापित करने पर घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य, ऐश्वर्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि यह उपाय श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से जीवन में आर्थिक स्थिरता आती है और दरिद्रता दूर होती है।

लक्ष्मी प्राप्ति एवं लक्ष्मी को स्थिर करने के लिए महर्षि भृगु जी द्वारा मार्गदर्शन किया गया विशेष श्री यंत्र उपाय। जानें, 24 मार्च 2026 को महर्षि भृगु द्वारा बताए गए श्री यंत्र उपाय से कैसे करें लक्ष्मी प्राप्ति और धन को स्थिर। पढ़ें पूर्ण विधि, सामग्री और सावधानियां। 

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यंत्र बनाने का शुभ मुहूर्त: यंत्र बनाने की तिथि 24 मार्च 2026 दिन मांगलवार है, समय प्रातः 8 से 11 बजे या संध्याकाल के समय इस यंत्र का निर्माण किया जा सकता है। यंत्र में प्रयोग की जाने वाली सामग्री इस प्रकार है- सवा मीटर लाल कपड़ा, 10 गुलाब के शुद्ध व खिले हुए फूल, थोड़ी सी लाल चंदन की लकड़ी, रोली, मौली, 9 कमलगट्टे ( जिसमें सुराख नहीं होने चाहिए एवं खण्डित भी न हों) यथाशक्ति दक्षिणा जोकि सिक्के के रुप में होनी चाहिए जैसे 1, 2, 5 या 10 का सिक्का। 

विधि- सबसे पहले लाल कपड़े को बिछा लें, फिर उस पर गंगा जल का छिंटा देकर एक गुलाब के फूल की पत्तियों को आसन के रूप में इस्तेमाल करें। 1 गुलाब का फूल हाथ में लेकर इन मंत्रों का 1 - 1 बार जाप करें।

देवी मंत्र- सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सवार्थलक्ष्मी प्राप्ति एवं लक्ष्मी को स्थिर करने के लिए महर्षि भृगु जी द्वारा मार्गदर्शन किया गया विशेष उपाय साधिके शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते

गायत्री मंत्र- ॐ र्भू भुवः स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

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फिर गुलाब के फूल को उस कपड़े पर रख दें। इसी प्रकार 9 फूलों पर एक बार गायत्री मंत्र और 1 बार देवी मंत्र का जाप करके कपड़े पर रखते जाएं। थोड़ी सी लाल चंदन की लकड़ी रखकर, उस पर मौली रख दें। रोली की पूड़ियां खोलकर रख दें। फिर 9 कमलगट्टे दक्षिणा सहित रखें। लक्ष्मी माता की विराजित अवस्था का ध्यान करके प्रार्थना करें, हे मां लक्ष्मी आज मैं आपको इन मंत्रों के द्वारा जागृत करने आया हूं। कृपा करके जागृत होकर मेरे घर में स्थिर रूप में वास करें। धन-धान्य, ऐश्वर्या, आनंद, वैभव, यश, मान, कीर्ति व सभी प्रकार के सुख प्रदान करें व सुखों को भोगने की आज्ञा भी प्रदान करने का आशीर्वाद दें।

फिर उस कपड़े को लपेट कर व ऊपर से मौली व धागे से बांधकर अब तैयार हो चुके श्री यंत्र को या तो घर के मंदिर में अथवा धन रखने के स्थान पर रखें। 

ध्यान रखें- एक बार श्रीयंत्र स्थापित करने के उपरांत उसे उसके स्थान से कभी भी हिलाया न जाए। तभी स्थिर लक्ष्मी का सुख प्राप्त कर सकेंगे। इस यंत्र की वैद्यता चैत्र नवरात्रि के मंगलवार से शरद नवरात्रि के मंगलवार तक ही है। उस दिन दोबारा से इस श्री यंत्र का निर्माण करें। नया श्री यंत्र स्थापित करके फिर पुराना वाला श्री यंत्र उठाकर किसी भी देवी माता के मंदिर में मौली अथवा धागा हटाकर कपड़े को खोलकर मां के सामने रख दें व प्रार्थना करें,  हे माता ! जिस तरह से आपने पहले सुख-समृद्धि प्रदान की वैसी कृपा आगे भी बनाए रखें व इस श्री यंत्र को स्वीकार करें।

यंत्र निर्माण के दौरान सावधानियां - यंत्र निर्माण की सामग्री की कोई भी वस्तु खंडित नहीं होनी चाहिए - जैसे कि गुलाब के फूल, कमलगटटे, लाल चंदन की लकड़ी, लाल कपड़ा इत्यादि। क्योंकि खंडित सामग्री से किया गया कोई भी कार्य पूर्ण फलदायी नहीं रहता।  

Sanjay Dara Singh 
AstroGem Scientist
LLB., Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM).

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Content Writer

Niyati Bhandari

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