Yam Panchak 2026 Dates & Rituals: धनतेरस से शुरू हो रहा 5 दिनों का यम पंचक, जानिए अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने का महाउपाय
punjabkesari.in Thursday, Nov 05, 2026 - 09:50 AM (IST)
Yam Panchak 2026 Dates & Rituals: सनातन धर्म में दीपावली का महापर्व केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पांच दिनों तक चलने वाला एक पावन अनुष्ठान है। धनतेरस से लेकर भाई दूज तक मनाए जाने वाले इस पांच दिवसीय उत्सव को 'यम पंचक' कहा जाता है। कार्तिक मास में आने वाला यह पर्व मृत्यु के देवता यमराज की पूजा और प्राकृतिक तथा जीव जगत के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार, यम पंचक का पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर संपन्न होता है।
6 नवंबर 2026 को यम पंचक का प्रारंभ धनतेरस से होगा और समापन 11 नवंबर 2026 से भाई दूज पर होगा। यह पांच दिवसीय महापर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों और पड़ोसी देश नेपाल में बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
दिवाली के त्यौहार को दीओं का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन से हर तरफ़ दीए ही दीए जगमगाते हैं। चारों ओर दीपक की रोशनी से लगभग भारत का हर कोना रोशन हो जाता है। तो वहीं इससे पहले मनाए जाने वाले त्यौहार धनतेरस के दिन भी दीए जलाने की परंपरा है। कहा जाता है इस दिन अकाल मृत्यु से बचने के लिए यम देव को प्रसन्न करने के लिए उनके लिए दीए जलाए जाते हैं साथ ही साथ उनकी पूजा-अर्चना भी की जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुल 13 दीपक जलाने की पंरपरा प्रचलित है। मगर इस बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं कि ये 13 के 13 दीए कहां-कहां जलाए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे जलाने का सही समय होता है रात को सोने से पहले। कहा जाता है इस दीप को जलाने के लिए पुराने दीपक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे पूरी तरह से सरसों के तेल से भर लिया जाता है। इसे घर से बाहर दक्षिण को ओर मुख करके नाली या कूड़े के ढेर के पास रखा जाता है। जिसके बाद जल अर्पित कर दीपदान किया जाता है।
कुछ लोगों के घरों में धनतेरस की रात को घर का सबसे बुजुर्ग सदस्य एक दीया जला कर पूरे घर में घुमाता है और फिर उसे लेकर घर से बाहर कहीं दूर रख आता है। इस दौरान घर के अन्य सदस्य इस दीये को देखते तक नही हैं, इसे यम का दीया कहा जाता है। माना जाता है कि पूरे घर में इसे घूमा कर बाहर ले जाने से मतलब होता है कि सभी बुराईयां और बुरी शक्तियां घर से बाहर चली जाएं।
अगर दीओं को वास्तु की दृष्टि से देखा जाए तो इन्हें जलाने से घर में सकारात्मक उर्जा का प्रवाह अधिक होता है। जिससे घर-परिवार के सदस्यों का जीवन बेहतर व खुशहाल होता है।

क्यों मनाया जाता है यम पंचक, जानिए इसका धार्मिक महत्व
मान्यता है कि इन पांच दिनों में यमराज के नाम का दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों पर मंडराता अकाल मृत्यु का खतरा और अनहोनी का भय टल जाता है। यह पर्व मनुष्य को अपने आसपास के पशु-पक्षियों और प्रकृति के प्रति सम्मान, कृतज्ञता तथा दया भाव रखने की प्रेरणा देता है।
यम पंचक के 5 दिनों में इस विधि से करें पूजा
पहला दिन (कौआ पूजा): यम पंचक के पहले दिन कौओं की पूजा कर उन्हें भोजन दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में कौए को यमराज का संदेशवाहक माना गया है। इन्हें भोजन कराने से अनहोनी से बचाव होता है।
दूसरा दिन (कुत्ता पूजा): दूसरे दिन कुत्ते की पूजा की जाती है। सनातन धर्म में कुत्ते का संबंध यमराज और भगवान भैरव दोनों से माना जाता है।
तीसरा दिन (गाय पूजा व दीपावली): तीसरे दिन समृद्धि की प्रतीक गायों का पूजन होता है। इसी दिन दीपों का त्यौहार दीपावली भी मनाया जाता है, जिसमें देवी लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश की आराधना की जाती है।
चौथा दिन (बैल पूजा व गोवर्धन पूजा): चौथे दिन बैलों की पूजा का विधान है तथा इसके साथ ही गोवर्धन पूजा का उत्सव मनाया जाता है।
पांचवां दिन (भाई दूज): यम पंचक का समापन भाई दूज के साथ होता है, जो भाई-बहन के पवित्र प्रेम और स्नेह का प्रतीक है।

