Govardhan Puja 2026 : दिवाली के बाद कब मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा? जानें तिथि और पूजा विधि

punjabkesari.in Wednesday, Nov 04, 2026 - 04:29 PM (IST)

Govardhan Puja 2026 : कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से पांच दिवसीय का समय शुरू हो जाता है और इन्हीं पांच दिवसों में से एक है गोवर्धन पूजा। हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है, जो की दिवाली के पर्व के बाद आती है। सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है और इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा की जाती है। लेकिन साल 2026 में गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि आखिर यह पर्व 9 नवंबर को मनाया जाएगा या 10 नवंबर को? अगर आप भी इस उलझन में हैं, तो आज की यह जानकारी आपके लिए बेहद खास साबित हो सकती है। तो आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा के शुभ मुहूर्त और  भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का इस पर्व से संबंध के बारे में- 

Govardhan Puja 2026

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 09 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा और इसका समापन 10 नवंबर दिन मंगलवार को दोपहर 02 बजे होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार देखा जाएं तो साल 2026 में गोवर्धन पूजा का पर्व 10 नवंबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा। आगे बात करें गोवर्धन पूजा मुहूर्त की तो इसका शुभ समय सुबह 06 बजकर 45 मिनट से सुबह 08 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। जिसकी कुल अवधि 02 घंटे और 09 मिनट रहेगी।

Govardhan Puja 2026

गोवर्धन पूजा का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की उस दिव्य लीला से है, जब उन्होंने अपनी छोटी उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों और उनके पशुओं की रक्षा की थी। कथा के अनुसार यह बात उस समय की है जब ब्रज के लोग अच्छी वर्षा और समृद्धि के लिए देवराज इंद्र की पूजा कर रहे थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि उनके जीवन और आजीविका में गोवर्धन पर्वत, प्रकृति और गौ माता का विशेष योगदान है। इसलिए उन्हें भी सम्मान देना और उनकी पूजा करना जरूरी है। इसके बाद ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इससे क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने ब्रज में मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी।लगातार बारिश से जब ब्रजवासी परेशान हो गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। सभी ब्रजवासियों और उनके पशुओं ने पर्वत के नीचे आश्रय लिया। मान्यता है कि सात दिनों तक भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाए रखा और सभी की रक्षा की। अंत में देवराज इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। इसी लीला की स्मृति में हर साल गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व प्रकृति, पशुधन और अन्न के महत्व को भी दर्शाता है।

गोवर्धन पूजा विधि 

सबसे पहले गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के आंगन या किसी साफ स्थान पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। कुछ स्थानों पर इसे फूलों और पत्तियों से भी सजाया जाता है। गोवर्धन पर्वत के पास भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद रोली, चावल, फूल, दीपक, धूप और नैवेद्य आदि से भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज की पूजा करें। गोवर्धन पर्वत को जल अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। इसके बाद गोवर्धन महाराज की परिक्रमा करें और पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप और गोवर्धन पूजा की कथा का पाठ कर सभी को प्रसाद बांटे।

Govardhan Puja 2026

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Content Editor

Sarita Thapa

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