धनतेरस पर क्यों किया जाता है 4 बत्तियों वाला दीपदान? जानें यमराज से जुड़ी मान्यता

punjabkesari.in Sunday, Nov 01, 2026 - 12:03 PM (IST)

Why Light Yam Diya Dhanteras : सनातन धर्म में धनतेरस को बहुत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन केवल भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की ही पूजा नहीं की जाती है, बल्कि इस शाम मृत्यु के देवता यमराज के नाम से चौमुखी दीपक जलाने की भी एक बेहद महत्वपूर्ण परंपरा है। धार्मिक शास्त्रों में इस दिन विशेष दीपदान को यम दीपम या यम के नाम का दीया कहा जाता है। माना जाता है कि धनतेरस की रात यमदेव के लिए जलाया गया यह दीया परिवार को अकाल मृत्यु  के भय से मुक्त करता है और घर में सुख-शांति व दीर्घायु का वरदान लाता है। तो आइए जानते हैं कि धनतेरस पर 4 बत्तियों वाला दीया क्यों जलाया जाता है, इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या है और इसे जलाने का सही वास्तु और धार्मिक तरीका क्या है।

Why Light Yam Diya Dhanteras

 

 4 बत्तियों वाला दीया ही क्यों जलाते हैं?

शास्त्रों में 4 बत्तियों वाले दीपक का संबंध चारों दिशाओं से माना गया है। चौमुखी दीपक जलाकर यमराज से प्रार्थना की जाती है कि घर के सदस्यों की पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण- चारों दिशाओं से रक्षा हो। मान्यता है कि चौमुखी दीया चारों दिशाओं के अंधकार और नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करता है। इससे यमदेव प्रसन्न होते हैं और परिवार पर आने वाले संकटों का नाश होता है।

Why Light Yam Diya Dhanteras

क्या है यमराज से जुड़ी पौराणिक कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय हेम नाम के राजा के घर पुत्र का जन्म हुआ। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि विवाह के चार दिन बाद राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। यह जानकर राजा और रानी बहुत चिंतित रहने लगे। समय बीतने के साथ राजकुमार का विवाह हुआ। उसकी पत्नी को जब इस भविष्यवाणी के बारे में पता चला तो उसने अपने पति की जान बचाने का निश्चय किया। विवाह के चौथे दिन उसने घर के मुख्य द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों और धन का ढेर लगा दिया। साथ ही पूरे महल में दीपक जलाकर रोशनी कर दी। कहा जाता है कि जब यमराज सर्प का रूप धारण करके राजकुमार के प्राण लेने पहुंचे तो दीपकों की रोशनी और आभूषणों की चमक से उनकी आंखें चकाचौंध हो गईं। वह राजकुमार तक नहीं पहुंच सके। इस तरह राजकुमार की जान बच गई। मान्यता है कि तभी से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा शुरू हुई। माना जाता है कि श्रद्धा से यम दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

Why Light Yam Diya Dhanteras

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sarita Thapa

Related News