वैशाख अमावस्या 2026: पितृ दोष से मुक्ति का महासंयोग, लेकिन रात की ये 6 गलतियां कर सकती हैं आपको कंगाल और परेशान!
punjabkesari.in Friday, Apr 17, 2026 - 09:57 AM (IST)
Vaishakh Amavasya upay: हिंदू धर्म में वैशाख मास की अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व बताया गया है। साल 2026 में यह तिथि पितृ तर्पण, दान-पुण्य और आत्म-शुद्धि के लिए बेहद फलदायी मानी जा रही है। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की रात जितनी प्रभावशाली होती है, उतनी ही संवेदनशील भी। यदि इस दौरान कुछ नियमों की अनदेखी की गई, तो व्यक्ति को मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।

Vaishakh Amavasya 2026 Date शुभ मुहूर्त और तिथि
पंचांग गणना के अनुसार, वैशाख अमावस्या की तिथि 16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को रात 08:11 बजे शुरू हो चुकी है और 17 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को शाम 05:21 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, अमावस्या का मुख्य पर्व 17 अप्रैल को मनाया जाएगा।
Perform these acts for the peace of your ancestors पितरों की शांति के लिए करें ये काम
गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।
वैसे तो वैशाख अमावस्या पर अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करें लेकिन जल और अन्न का दान सर्वोत्तम माना गया है।
पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु की पूजा के साथ धन की देवी लक्ष्मी की पूजा भी करें।
कुछ और करना संभव हो या न हो लेकिन पितरों के निमित्त तर्पण अवश्य करें। तर्पण से पितरों की आत्मा तृप्त होती है, जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और परिवार पर दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Do not make these 6 mistakes on the night of Vaishakh Amavasya वैशाख अमावस्या की रात न करें ये 6 गलतियां
माना जाता है कि अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं। ऐसे दिन की प्रकृति को जानकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। ज्योतिष में चन्द्र को मन का देवता माना गया है। अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसे में जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। लड़कियां मन से बहुत ही भावुक होती हैं। इस दिन चन्द्रमा नहीं दिखाई देता, जिससे महिलाओं के शरीर में हलचल अधिक बढ़ जाती है। जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है उसे नकारात्मक शक्तियां अपने प्रभाव में जल्दी ले लेती हैं।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं और लोक किवंदतियों के अनुसार हर अमावस्या की रात नेगेटिव ऊर्जाएं अधिक सक्रिय रहती हैं। कब और कैसे वे हावी होने लगती है एवं इनसे कैसे बचा जा सकता है, आइए जानते हैं:
घर में अंधेरा न रखें: सूर्य ढलने के बाद घर में दीपक जलाएं अथवा रोशनी अवश्य रखें। अंधेरे में नकारात्मक शक्तियां जल्दी ही हावी होने लगती हैं।
पीपल के पेड़ से दूरी: शाम के समय पीपल की पूजा करें, दीपदान करें लेकिन जैसे ही रात का अंधेरा छाने लगे। उस समय वहां से दूरी बना लें। पीपल को छूने से बचें।
विचारों की पवित्रता: न केवल वाणी से बल्कि अंतरात्मा से गुस्सा न करें, किसी के प्रति मन में मैल न लेकर आएं। वाद-विवाद से बचें।
तामसिक भोजन का त्याग: वैशाख अमावस्या की रात तामसिक भोजन, मांस-मदिरा अथवा किसी भी तरह के व्यसन से दूर रहें।
बाल और नाखून न काटें: अमावस्या को बाल और नाखून नहीं काटें और न ही सिर धोए। वैक्सीन और थ्रेडिंग से भी परहेज रखें।
बाहर न निकलें: रात को सुनसान जगह पर न जाएं। शमशान भूमी से उचित दूरी बनाकर रखें।

Perform these acts on the night of Vaishakh Amavasya वैशाख अमावस्या की रात करें ये काम
अमावस्या की रात को सकारात्मक बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु का ध्यान करें और घर के मंदिर में एक दीपक जलाकर पितरों से सुख-शांति की प्रार्थना करें।
आज रात जिस घर में देवी लक्ष्मी का पूजन होगा उस घर में देवी सोने और रत्नों के रूप में विराजेंगी। कहते हैं की अमावस्या की रात मां जिस घर में प्रवेश करती हैं वहां अपनी संपूर्ण शक्तियों के साथ विराजती हैं और देती हैं दोनों हाथों से अपना आशीर्वाद।
आज रात अपने घर के मुख्य द्वार पर चंदन अथवा कुमकुम से गदा, कमल, सुदर्शन चक्र, स्वस्तिक, ॐ, शंख, देवी लक्ष्मी के चरण चिन्ह, त्रिशुल, धनुष का निशान जिसमें एक तीर लगा हो के निशान बनाएं। साथ ही साथ इस मंत्र का जाप करते रहे
ॐ पहिनी पक्षनेत्री पक्षमना लक्ष्मी दाहिनी वाच्छा भूत-प्रेत सर्वशत्रु हारिणी दर्जन मोहिनी रिद्धि सिद्धि कुरु-कुरु-स्वाहा।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
