Somvati Amavasya Bhanwari Ritual: सोमवती अमावस्या पर अखंड सौभाग्य के लिए ऐसे दें भंवरी, जानें जरूरी सामग्री और नियम
punjabkesari.in Thursday, Jun 11, 2026 - 10:41 AM (IST)
Somvati Amavasya Bhanwari Ritual: हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। यह दिन न केवल पितरों के तर्पण के लिए फलदायी माना जाता है, बल्कि सुहागिन महिलाओं के लिए भी यह 'अखंड सौभाग्य' की प्राप्ति का महापर्व है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा और 'भंवरी देना' एक ऐसी पारंपरिक रस्म है, जो सदियों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है।

क्या है 'भंवरी देना' और इसका महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए 'भंवरी' का अनुष्ठान करती हैं। इस धार्मिक क्रिया में पीपल के पेड़ के चारों ओर 108 बार कच्चा सूत (धागा) लपेटते हुए परिक्रमा की जाती है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि पीपल के पेड़ में त्रिदेवों का वास होता है और इसकी परिक्रमा करने पर शादीशुदा जीवन में चल रहे हर कष्ट का अंत होता है।

भंवरी अनुष्ठान विधि
सोमवती अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों अथवा घर पर ही किसी भी पवित्र नदी का जल स्नान के पानी में मिलाकर स्नान करें। उसके बाद महिलाएं नई-नवेली दुल्हन की तरह 16 श्रृंगार करें। फिर अन्य महिलाओं के साथ पीपल के पेड़ के पास इकट्ठा होए और मिलकर पूजा करें। यदि किसी कारणवश आप पीपल के पेड़ के पास नहीं जा सकते अथवा समीप में कहीं पीपल का पेड़ न हो तो अकेले भी पूजा की जा सकती है।
परिक्रमा की संख्या: पीपल के तने पर कच्चा सूत, कलावा या मौली लपेटते हुए कुल 108 बार परिक्रमा (भंवरी) की जाती है।
भेंट चढ़ाना: हर परिक्रमा के साथ एक छोटी वस्तु अथवा अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी भेंट पीपल के वृक्ष के पास चढ़ाई जाती है। इसे ही 'भंवरी चढ़ाना' कहते हैं।
वस्तुओं का चयन: इन 108 वस्तुओं में बताशे, फल, मेवे या सुहाग की सामग्री (जैसे चूड़ियां, बिंदी) शामिल हो सकती है। अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी अर्पित किया जा सकता है।

पहली सोमवती अमावस्या है बेहद खास
जो सुहागिन महिला पहली बार सोमवती अमावस्या पर भंवरी का अनुष्ठान शुरू कर रही हैं तो उसके लिए सामग्री का विशेष नियम है। स्रोतों की मानें तो, पहली भंवरी में धान (चावल), पान, हल्दी, सिंदूर और सुपारी अर्पित करना अनिवार्य होता है। इसके बाद की आने वाली अमावस्याओं पर अपनी श्रद्धानुसार फल, मिठाई या अन्य सुहाग सामग्री चढ़ाई जा सकती है।
सोमवती अमावस्या के दिन धान, पान, हल्दी, सिंदूर, सुपारी, फल, मिठाई, सुहाग सामग्री, खाने की सामग्री आदि की भंवरी दी जाती है और फिर भंवरी पर अर्पित किया गया सामान किसी सुपात्र ब्राह्मण, ननद या भांजे को दे देना चाहिए। सोमवती अमावस्या के दिन जो सुहागन भंवरी करती है वह सदा सुहागन रहती है। पीपल के पेड़ में समस्त देवों का वास होता है। भंवरी करते समय श्री गणेश, मां गौरी और सोना धोबिन का पूजन करने से सुहाग भाग अखण्ड रहता है। स्रोतों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने वाली महिला सदा सुहागन रहती है।

