Mangla gauri vrat 2026 : पहला मंगला गौरी व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, तभी मिलेगा मां गौरी का आशीर्वाद
punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 04:52 PM (IST)
Mangla gauri vrat 2026 : सनातान धर्म में मंगला गौरी व्रत को मां पार्वती की पूजा के लिए बहुत खास और शुभ माना जाता है। सावन के हर मंगलवार मां पार्वती को समर्पित मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस साल 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को रखा जाएगा। मंगला गौरी व्रत सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से मंगला गौरी का व्रत रखने से और अराधना करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता और खुशहाली बनी रहती है और कुंवारी लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। मंगला गौरी व्रत रखने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। यदि आप पहली बार मंगला गौरी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो पूजा को शुरू करने से पहले कुछ नियमों को जानना बहुत जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि मंगला गौरी की पूजा करने से पहले कौन से नियमों का पालन करना चाहिए।
मंगला गौरी व्रत के 5 सबसे महत्वपूर्ण नियम
16 बत्तियों का दीया
मंगला गौरी व्रत की पूजा में दीपक का बहुत खास महत्व है। इस दिन आटे से बना एक चौमुखा दीपक तैयार करें और पूजा करते समय माता के सामने 16 बत्तियों वाला एक दीपक जलाएं। इस बात का जरूर रखें कि पूजा के दौरान यह दीपक बुझना नहीं चाहिए।
16 की संख्या का चमत्कारी महत्व
देवी मंगला गौरी की पूजा में हर सामग्री की संख्या 16 होनी अनिवार्य मानी गई है। माता को अर्पित किए जाने वाले फल, फूल, लड्डू, चूड़ियां, और सुहाग की सामग्री की संख्या 16-16 होनी चाहिए। यदि आप पहली बार व्रत रख रही हैं, तो इस संख्या का विशेष ध्यान रखें।
भोजन का विशेष नियम
मंगला गौरी का व्रत रखने वाली महिलाओं को दिन में केवल एक ही बार भोजन करने का नियम है। वह भोजन पूरी तरह सात्विक (बिना प्याज, लहसुन और नमक के) होना चाहिए। कुछ लोग इस व्रत में फलाहार करते हैं, तो कुछ मीठा भोजन करते हैं। आप अपने पारिवारिक रिवाज के अनुसार इसे चुन सकती हैं, लेकिन नमक का सेवन करने से बचें।
वाणी और व्यवहार पर संयम
मंगला गौरी का व्रत खासतौर पर वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है। मंगला गौरी व्रत के दिन किसी भी तरह का वाद-विवाद न करें और न ही किसी पर गुस्सा करना चाहिए। विशेष रूप से अपने जीवनसाथी के प्रति मन में कोई खटास न लाएं। किसी की चुगली या निंदा करने से व्रत का पुण्य समाप्त हो जाता है।
सुहाग सामग्री का दान
व्रत और कथा पूरी होने के बाद, शाम के समय पूजा की थाली में रखी सुहाग की सामग्री को किसी योग्य ब्राह्मण महिला या अपनी सास या जेठानी के चरण स्पर्श करके उन्हें आदरपूर्वक भेंट करें। ऐसा करने से माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अखंड सौभाग्य का वरदान देती हैं।
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