Sharad Purnima 2026 : चंद्रमा की 16 कलाएं क्या हैं? शरद पूर्णिमा पर जानें इनके नाम, अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

punjabkesari.in Sunday, Oct 25, 2026 - 01:08 PM (IST)

Sharad Purnima 16 Lunar Phases Meaning : सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। यही वजह है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा के दर्शन, पूजा और अर्घ्य देने को खास माना जाता है। इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले  भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद्रमा की 16 कलाएं कौन-कौन सी हैं और इनका आध्यात्मिक अर्थ क्या है? तो आइए जानते हैं चंद्रमा की 16 कलाओं के नाम, अर्थ और उनके महत्व के बारे में-

Sharad Purnima 16 Lunar Phases Meaning

क्या होती हैं चंद्रमा की 16 कलाएं?

धार्मिक परंपरा में कला का अर्थ किसी गुण, शक्ति, क्षमता या विशेषता के पूर्ण विकास से भी लगाया जाता है। चंद्रमा की 16 कलाओं को उसकी पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसी संदर्भ में भगवान श्रीकृष्ण को भी 16 कलाओं से परिपूर्ण बताया गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में 16 कलाओं के नामों की सूचियां अलग-अलग मिल सकती हैं। नीचे प्रचलित आध्यात्मिक व्याख्या के आधार पर इनके नाम और अर्थ दिए गए हैं।

Sharad Purnima 16 Lunar Phases Meaning

चंद्रमा की 16 कलाओं के नाम और उनके अर्थ

अमृत कला
अमृत का अर्थ है जीवन देने वाला तत्व। यह कला जीवन, पोषण और कल्याण का प्रतीक मानी जाती है।

मनदा कला
मनदा को मन की प्रसन्नता और आनंद से जोड़कर देखा जाता है। यह जीवन में उत्साह और संतोष का भाव दर्शाती है।

पुष्प कला
पुष्प का अर्थ फूल है। यह सुंदरता, कोमलता और जीवन में अच्छे गुणों के विकास का प्रतीक है।

पुष्टि कला
पुष्टि का अर्थ पोषण और वृद्धि है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह शरीर, मन और विचारों के विकास को दर्शाती है।

तुष्टि कला
तुष्टि का अर्थ संतोष है। यह व्यक्ति को उपलब्धियों के प्रति आभार और मन में संतुष्टि बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

धृति कला
धृति का अर्थ धैर्य और स्थिरता है। यह कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखने और सही निर्णय लेने की क्षमता का प्रतीक है।

शशिनी कला
शशिनी का संबंध चंद्रमा से माना जाता है। यह शीतलता, सौम्यता और शांत स्वभाव का प्रतीक है।

Sharad Purnima 16 Lunar Phases Meaning

चंद्रिका कला
चंद्रिका का अर्थ चांदनी है। यह अंधकार में प्रकाश, आशा और सकारात्मकता का संदेश देती है।

कांति कला
कांति का अर्थ चमक या आभा है। यह व्यक्तित्व की सुंदरता, तेज और आंतरिक ऊर्जा को दर्शाती है।

ज्योत्स्ना कला
ज्योत्स्ना का अर्थ चंद्रमा की उजली रोशनी है। आध्यात्मिक रूप से इसे ज्ञान और विवेक के प्रकाश से जोड़ा जाता है।

श्री कला
श्री का संबंध सौभाग्य, वैभव और समृद्धि से है। यह जीवन में शुभता और उन्नति का प्रतीक मानी जाती है।

प्रीति कला
प्रीति का अर्थ प्रेम और स्नेह है। यह परिवार, मित्रों और समाज के साथ मधुर संबंध बनाए रखने का संदेश देती है।

अंगदा कला
अंगदा को कुछ पारंपरिक व्याख्याओं में शक्ति, सामर्थ्य और सुरक्षा के भाव से जोड़ा जाता है। यह आत्मबल का प्रतीक मानी जा सकती है।

पूर्णा कला
पूर्णा का अर्थ पूर्णता है। यह जीवन में संतुलन, परिपक्वता और अपने कर्तव्यों को समझने का भाव दर्शाती है।

पूर्णामृत कला
यह नाम पूर्णता और अमृत तत्व के मेल को दर्शाता है। आध्यात्मिक अर्थ में इसे कल्याण, संतुलन और जीवन की सार्थकता से जोड़ा जाता है।

स्वरूपवती कला
स्वरूपवती का अर्थ अपने वास्तविक स्वरूप या प्रकृति को प्रकट करने वाली शक्ति से लगाया जाता है। यह आत्मबोध और आंतरिक चेतना का प्रतीक मानी जाती है।

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भगवान श्रीकृष्ण को 16 कलाओं से परिपूर्ण क्यों कहा जाता है?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण को पूर्णावतार कहा जाता है। कई परंपराओं में उन्हें 16 कलाओं से युक्त माना गया है। इन कलाओं का संबंध केवल बाहरी शक्ति से नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रेम, करुणा, विवेक, नेतृत्व और धर्म की रक्षा जैसे गुणों से भी जोड़ा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में मित्रता, प्रेम, नीति, धर्म और कर्म का अनूठा मेल दिखाई देता है। इसी कारण उन्हें पूर्णता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, 16 कलाओं की व्याख्या अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में भिन्न हो सकती है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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