कुंडली में एक से ज्यादा हो शनि तो क्या करें, जानें यहां

05/21/2021 5:56:48 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी दो ग्रहों की युति होती है तो जातक को किसी न किसी प्रभाव का सामना जरूर करना पड़ता है। लाल किताब की मानें तो कुंडली में जब भी दो ग्रहों की युति होती है तो उन्हें मनसुई ग्रह के नाम से जाना जाता है। सरल भाषा में इसे बनावटी या नकली ग्रह भी कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर भी कहा जाता है यह ठीक ऐसा ही है जैसे लाल और हरा रंग मिलकर भूरा रंग बनता है, पीले और नीला को मिलाकर हरा रंग बनता है। कहा जाता इन बनावटी ग्रहों का उपयोग पक्के ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए किया जाता है। ज्यादातर लोग नवग्रह में से सबसे अत्यंत जिनसे डरते हैं वो है शनि देव। क्योंकि कहा जाता है इनके दुष्प्रभाव से जीवन में कई तरह की परेशानियां आने लगती हैं। तो अगर आपकी कुंडली में 2 या 3 शनि हैं तो व्यक्ति को आगे बताए जाने वाले खास उपाय बताने चाहिए। 

ज्योतिष शास्त्री बताते हैं कि सूर्य और बुध मिलकर नकली मंगल नेक का रूप ले लेता है अर्थात उच्च का मंगल बन जाता हैं और सूर्य और शनि मिलकर मंगल बद अर्थात नीच का मंगल बन जाता हैं, अर्थात राहु बन जाता हैं।

इसके अलावा मंगल और बुध मिलकर शनि का रूप लेते हैं, शुक्र और गुरु मिलकर भी शनि बनते हैं, परंतु इनका स्वभाव केतु के समान होता है। मतलब यह कि कुंडली में एक तो वह शनि जो अकेला कहीं बैठा होता है दूसरा मंगल और बुध कहीं भी युति बना रहे हों या इकट्ठे बैठे हों तो उससे निर्मित होने वाला शनि तथा तीसरा शुक्र और गुरु कहीं भी युति बनाकर इकट्ठे बैठे जाने पर निर्मित शनि से अशुभ प्रभाव झेलने पड़ते हैं।

ऐसे में क्या उपाय करना चाहिए आइए जानते हैं- 
1. ऐसा स्थिति में व्यक्ति को झूठ बोलना, जुआ खेलना, ब्याज का धंधा करना और शराब पीना तुरंत ही छोड़ देना चाहिए, अन्यथा जीवन में पछतावे के सिवाय कुछ बाकि नहीं रहता। 

2. लगातार 5 शनिवार छायादान करें।

3. शनिवार के दिन भैरव महाराज को कच्चा दूध चढ़ाएं।

4. शमी के पेड़ की सेवा करें।

5. दांत, नाक और कान सदा साफ रखें।

6. कौवे को रोटी खिलाएं।

7. प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ें।

8. सफाईकर्मी को पैसा दान करें।

11. 10 अंधों को भोजन कराएं।

अगर शनि कुंडली के प्रथम भाव यानी लग्न में हो तो भिखारी को तांबा या तांबे का सिक्का कभी दान नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से पुत्र को कष्ट होगा। यदि शनि आयु भाव में स्थित हो तो ऐसे में व्यक्ति को धर्मशाला का निर्माण नहीं करवाना चाहिए। जब तक कुंडली में शनि अष्टम भाव में हो तो तब तक मकान न बनाएं, न ही बना बनाए मकान न खरीदें। 

(नोट- पंजाब केसरी उपरोक्त दी गई किसी जानकारी के पुष्टि नहीं करता, तमाम दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित हैं।)
 


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Content Writer

Jyoti

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