Chaitra Navratri 2026: कन्या पूजन के दिन बरतें ये जरूरी सावधानियां !
punjabkesari.in Tuesday, Mar 24, 2026 - 09:57 AM (IST)
Rules for kanya pooja: चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के पावन पर्व में महाअष्टमी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। यह दिन माता दुर्गा के आठवें स्वरूप, मां महागौरी को समर्पित होता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और कन्या पूजन का आयोजन करते हैं। मान्यता है कि महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन करने और कन्याओं को भोजन कराने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

महाअष्टमी 2026 तिथि और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार:
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 25 मार्च 2026, दोपहर 1:50 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 26 मार्च 2026, सुबह 11:48 बजे
उदयातिथि के अनुसार, महाअष्टमी और कन्या पूजन 26 मार्च 2026 को किया जाएगा।

कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त
महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए दो प्रमुख शुभ मुहूर्त निर्धारित हैं:
पहला मुहूर्त: सुबह 6:18 बजे से 7:50 बजे तक
दूसरा मुहूर्त: सुबह 10:55 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक
कन्या पूजन का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के दौरान 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। इस दिन उन्हें घर बुलाकर सम्मानपूर्वक पूजा की जाती है और भोजन कराया जाता है। यह परंपरा शक्ति स्वरूपा देवी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।

कन्या पूजन के दौरान रखें ये सावधानियां
कन्या पूजन करते समय निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
उम्र का ध्यान रखें: 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को ही पूजन के लिए आमंत्रित करें।
स्वागत विधि: कन्याओं के घर आने पर उनके पैर धोकर सम्मानपूर्वक आसन दें।
सात्विक भोजन: भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। हलवा, पूड़ी और चना प्रमुख रूप से बनाए जाते हैं।
प्याज-लहसुन से परहेज: भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग न करें।
समान सम्मान: सभी कन्याओं को समान आदर दें, किसी प्रकार का भेदभाव न करें।
जबरदस्ती न करें: कन्याओं को भोजन के लिए मजबूर न करें, वे जितना प्रेम से ग्रहण करें उतना ही पर्याप्त है।
विदाई संस्कार: पूजन के बाद उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
महाअष्टमी का दिन नवरात्रि का अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर होता है। इस दिन श्रद्धा, भक्ति और नियमों के साथ कन्या पूजन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। सही विधि और सावधानियों के साथ किया गया पूजन विशेष फलदायी माना जाता है।
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