Radha Ashtami Special: साल में सिर्फ एक बार होते हैं श्री राधारानी के सुंदर चरण दर्शन, जानें भगवान शिव ने नारद जी को क्या बताया था रहस्य
punjabkesari.in Friday, Sep 18, 2026 - 10:02 AM (IST)
Radha Rani Charan Darshan: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सनातन धर्म में श्री राधा अष्टमी के नाम से जानी जाती है। यह पावन दिन भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति स्वरूपा श्री राधा जी के प्राकट्य दिवस के रूप में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
दोपहर 12 बजे हुआ था पावन प्राकट्य
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि 12 बजे हुआ था, वहीं श्री राधा रानी का प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दोपहर 12 बजे हुआ था। श्री राधा जी भगवान श्रीकृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी हैं तथा वे उनकी निज स्वरूपा, नित्य और सच्चिदानंदमयी शक्ति हैं, जो प्रकृति से परे ब्रह्म स्वरूपा हैं। ऐसा माना जाता है कि जहां श्री राधा जी का वास होता है, वहां श्रीकृष्ण स्वयं निवास करते हैं और जहां ये दोनों विराजमान हों, वहां कभी किसी वस्तु की कमी नहीं रहती।
वर्ष में केवल एक बार होते हैं श्री चरणों के दर्शन
भक्तजन श्री राधा रानी के मुखारविंद के दर्शन तो प्रतिदिन कर सकते हैं, लेकिन उनके अत्यंत सुंदर चरणकमलों के दर्शन केवल वर्ष में एक बार श्री राधा अष्टमी के दिन ही संभव होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी श्रद्धालु इस शुभ अवसर पर उनके चरणों के दर्शन कर लेता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
महादेव ने बताया श्री राधा रानी के चरणों का अलौकिक रहस्य
एक पौराणिक कथा के अनुसार, भक्ति के अवतार देवर्षि नारद ने भगवान सदाशिव के चरणों में प्रणाम कर यह प्रश्न पूछा कि श्री राधा देवी कौन हैं? क्या वे लक्ष्मी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंतरंग विद्या या मुनिकन्या हैं?
इस प्रश्न का उत्तर देते हुए भगवान सदाशिव ने कहा कि करोड़ों महालक्ष्मी भी श्री राधा जी के चरण कमलों की अपार शोभा के सामने नहीं ठहर सकतीं। उनके रूप, गुण और सौंदर्य का वर्णन तीनों लोकों में किसी एक मुख से करना संभव नहीं है। श्री राधा जी की रूप-माधुरी संपूर्ण जगत को मोहित करने वाले स्वयं श्रीकृष्ण को भी मुग्ध करने वाली है।

पारिवारिक सुख-शांति और महालक्ष्मी स्वरूप की पूजा
घर-परिवार में सुख, शांति, समृद्धि, संतान सुख और उन्नति की कामना से पति-पत्नी इस पावन व्रत का पालन करते हैं। सभी प्रकार के सुख प्रदान करने वाली श्री राधा रानी का यह व्रत श्री महालक्ष्मी जी के रूप में भी रखा और पूजा जाता है।
