Ganesh Chaturthi Story : भगवान गणेश का जन्म कैसे हुआ? जानें इसके पीछे की पूरी पौराणिक कहानी

punjabkesari.in Sunday, Sep 13, 2026 - 12:13 PM (IST)

Ganesh Chaturthi Story : हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का बहुत खास महत्व है। किसी भी पूजा, अनुष्ठान या नए काम की शुरुआत बिना गणपति की आराधना के अधूरी मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर शुभ कार्य में प्रथम पूज्य माने जाने वाले गणेश जी का जन्म कैसे हुआ था। उनके जन्म की पौराणिक कथा केवल एक चमत्कारिक घटना नहीं है, बल्कि यह माता पार्वती की ममता, बालक के कर्तव्यबोध और भगवान शिव के अपार तपोबल का एक अद्भुत संगम है। गणेश चतुर्थी का त्योहार इसी पावन प्रसंग की याद दिलाता है। तो आइए जानते हैं उस पौराणिक घटना के बारे में, जिसने एक नन्हे बालक को समस्त ब्रह्मांड का विघ्नहर्ता बना दिया।

गणेश चतुर्थी कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक बार माता पार्वती जब भगवान शंकर जी के साथ उत्सव क्रीड़ा कर रही थी तो उन पर थोड़ा मैल लग गया। जब उन्हें इसकी अनुभूती हुई तो उन्होंने शरीर से उस मैल को उतार दिया और उस मैल से उन्होंने एक बालक का शरीर बना दिया।   उन्होंने अपनी योग शक्ति से उस मैल से बने शरीर में प्राण डाल दिये। फिर उस बालक को आदेश दिया की वे स्नान करने जा रही है, किसी को भी भीतर न आने दें। फिर पार्वती जी स्नान करने चली गयी। इस दौरान भगवान शिव का वहां पर आगमन हुआ और गणेश जी ने माता की आज्ञा को मानते हुए उन्हें भवन में प्रवेश करने से मना कर दिया। बार-बार कहने पर भी जब गणेश जी न मानें तब भगवान शंकर जी ने क्रोध में आकर अपनी त्रिशूल से गणेश जी का मस्तक काट दिया। ये देखकर माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो उठी और उन्होंने भगवान शिव को अवगत कराया कि- यह बालक आप ही का पुत्र है। तब शिव जी ने अपने गणों को आज्ञा दी कि कि उत्तर दिशा में जाओ और वहां जो भी मां अपने बच्चे की तरफ पीठ कर के सोई हो उस बच्चे का सिर ले आना।  तब वह सहायक गण एक हाथी के बच्चे का सिर ले आये। जिसे शिव जी ने उस बालक के धड़ से जोड़ दिया। तब सभी ने उन्हें बहुत से आर्शीवाद दिये एवं किसी भी देव आराधना, पूजा, हवन इत्यादि में सबसे पहले पूजे जाने का वरदान भी दिया और इस तरह भगवान गणेश का जन्म हुआ।

दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार कहते हैं कि एक दिन चन्द्रमा को अपने सौंदर्य का अभिमान हो गया और उन्होंने गणेश जी के स्वरूप  का उपहास किया। अपने तिरस्कार पर गणेश जी ने चंद्रमा को श्राप दिया कि आज से तुम काले-कलंक से युक्त  हो जाओ तथा जो भी आज के दिन तुम्हारा मुख देखेगा वह भी कलंक का पात्र होगा। उस दिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि थी। चन्द्रमा के क्षमा-याचना करने पर गणपति जी ने कहा- भविष्य में तुम सूर्य से प्रकाश पाकर महीने में एक दिन पूर्णता को प्राप्त करोगे। मेरा श्राप केवल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को विशेष प्रभावी रहेगा, बाकी चतुर्थियों पर इतना प्रभावी नहीं होगा। इस दिन जो मेरा पूजन करेगा उसका मिथ्या कलंक मिट जायेगा। चतुर्थी तिथि के स्वामी गणपति हैं। उपरोक्त प्रसंग से लेकर आज तक अनेक लोगों ने गणपति जी के उस श्राप के प्रभाव का अनुभव किया तथा निरंतर अनुसंधान गीत प्रमाणों के कारण आम जनमानस ने भी इसे स्वीकार किया।

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Content Editor

Sarita Thapa

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