श्राद्ध पक्ष में सिर्फ तर्पण नहीं, मां-बाप की सेवा भी जरूरी ! जानें क्यों इसे माना गया है बड़ा पुण्य
punjabkesari.in Sunday, Oct 04, 2026 - 02:30 PM (IST)
Pitru Paksha True Meaning Hindi : आजकल श्राद्ध पक्ष चल रहा है। श्राद्ध का अर्थ है पितृ पक्ष को सम्मान देना, उनकी याद में भोजन खिलाकर उनकी आत्मा को प्रसन्न करना। पितृ पक्ष को दिया सम्मान तभी माना जाएगा जब हमने अपने माता-पिता, दादा-दादी और बड़े-बुजुर्गों को सम्मान दिया होगा और इस दुनिया में लाने वालों के प्रति कृतज्ञता दिखाई होगी। हमारे घर के सभी सदस्य निरोग हैं, हमारे घर में सहमति है और घर में सुख-समृद्धि है तो स्पष्ट है कि हमारे पितर संतुष्ट हैं और अगर घर में रोज लड़ाई-झगड़ा तथा चौबीस घंटे कलह-क्लेश रहता है तो हमें स्वत: समझ लेना चाहिए कि हमने पितरों को दुखी करके भेजा था।
जीते जी तो माता-पिता रोटी को तरसते रहें तो मरने के बाद उनके नाम का दान-पुण्य किसी काम का नहीं। वह कहावत है न ‘जिंदा को गाली, मरे को थाली।’ एक वृद्धाश्रम में एक बेटा अपनी मां को छोड़ गया। उस मां का वजन केवल 13 किलो था। मां ने बताया कि उसके बेटे ने दो वर्ष से उसे बाथरूम में बंद कर रखा था और दिन में केवल 2 चपातियां ही खाने को देता था। अब बताओ ऐसे कलियुगी कुपुत्र का कहां भला होगा? जिनके माता-पिता जीवित हैं, वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं और जिनके माता-पिता दुनिया से विदा ले गए हैं वे वृद्धाश्रम जाकर बुजुर्गों की सेवा करके पुण्य कमा सकते हैं।
माता-पिता ने हमसे पहले उस ईश्वर से साक्षात्कार करना है- कहीं उन्होंने हमारी शिकायत कर दी तो ईश्वर की नजर वक्री होने पर हमारा क्या हाल होगा, यह हम जानते ही नहीं। माता-पिता को समय दें। उनके पास बैठकर बातें करें। इक्ठ्ठे खाना खाएं। उनका पूरा ध्यान रखें और उनसे उनकी पूरी जिंदगी का मुफ्त में तजुर्बा लें। ‘बुजुर्ग हुंदे ने घरां दियां रौनकां, न रौनकां घटाएयो सोहनेयो। ए हुंदे ने माली बूटे लओन वाले, धुप्पे न बिठाएयो सोहनेयो।’
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