Phulera Dooj 2026: फूलेरा दूज के दिन फूलों से करें घर में ये काम, राधाकृष्ण की कृपा के साथ सकारात्मक ऊर्जा का होगा संचार
punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 11:45 AM (IST)
Phulera Dooj 2026 फूलेरा दूज 2026: फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को मनाई जाने वाली फूलेरा दूज ब्रज क्षेत्र में होली उत्सव की विधिवत शुरुआत मानी जाती है। यह दिन विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के दिव्य प्रेम से जुड़ा है। इस अवसर पर घर को फूलों से सजाना और मुख्य द्वार पर फूलों की रंगोली बनाना अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसका वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक महत्व भी है।

धार्मिक महत्व: क्यों सजाते हैं घर फूलों से?
शुभता और मंगल का प्रतीक
फूलों को सनातन परंपरा में पवित्रता और प्रसन्नता का प्रतीक माना गया है। फूलेरा दूज के दिन घर को पुष्पों से सजाने से देवी-देवताओं का स्वागत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
राधा-कृष्ण कृपा की प्राप्ति
मान्यता है कि इस दिन फूलों की होली खेली गई थी। इसलिए फूलों से सजावट करने से राधा-कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।
स्वयं सिद्ध मुहूर्त का प्रभाव
फूलेरा दूज को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है। इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल दीर्घकाल तक मिलता है। घर को सजाना और रंगोली बनाना सौभाग्य को आमंत्रित करने का प्रतीक है।

फूलों की रंगोली बनाने के लाभ
सकारात्मक ऊर्जा का संचार
मुख्य द्वार पर फूलों की रंगोली बनाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती। वास्तु शास्त्र के अनुसार प्राकृतिक तत्वों का प्रयोग वातावरण को शुद्ध करता है।
मानसिक शांति और तनाव में कमी
वैज्ञानिक दृष्टि से भी फूलों की सुगंध मन को शांत करती है, तनाव कम करती है और खुशी के हार्मोन (डोपामिन) को सक्रिय करती है।
पारिवारिक सामंजस्य
रंगोली बनाना एक सामूहिक क्रिया है। जब परिवार के सदस्य मिलकर इसे बनाते हैं, तो आपसी प्रेम और सहयोग बढ़ता है।
समृद्धि और सौभाग्य
गेंदा, गुलाब और मोगरा जैसे फूल शुभ माने जाते हैं। इनसे बनी रंगोली लक्ष्मी और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

क्या होता है इसका प्रभाव?
घर का वातावरण हल्का और आनंदमय बनता है।
वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।
मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
शुभ कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है।
फूलेरा दूज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, प्रकृति और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव है। इस दिन फूलों से घर सजाना और रंगोली बनाना धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानसिक और पारिवारिक सुख-शांति का भी माध्यम है। ब्रज की यह परंपरा हमें सिखाती है कि प्राकृतिक सौंदर्य और भक्ति का संगम ही जीवन में वास्तविक आनंद लाता है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
