Ganesh Visarjan 2026: गणेश विसर्जन का आखिरी दिन कब है? नोट करें अनंत चतुर्दशी की सटीक तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
punjabkesari.in Wednesday, Sep 23, 2026 - 11:02 AM (IST)
Ganpati Visarjan 2026 Shubh Muhurat: 10 दिनों से चले आ रहे गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की विदाई के साथ होता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से प्रथम पूज्य श्री गणेश जी का पूजन व आरती कर उन्हें विदा करते हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में गणपति विसर्जन की सही तारीख, दिनभर के शुभ मुहूर्त और विसर्जन की संपूर्ण धार्मिक विधि।
Ganpati Visarjan Date 2026 गणेश विसर्जन की सही तिथि
शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, गणेश विसर्जन का सबसे मुख्य और अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी होता है। हालांकि, कई परिवारों में गणपति की स्थापना के बाद तीसरे, पांचवें या सातवें दिन भी विसर्जन कर दिया जाता है। वहीं, मंदिरों और बड़े पूजा पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन अनंत चतुर्दशी को ही किया जाता है।
Anant Chaturdashi date अनंत चतुर्दशी तिथि: 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार)
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे से
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 25 सितंबर 2026 को रात 11:06 बजे तक
Anant Chaturdashi Shubh Muhurat अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त
25 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन के लिए दिन और रात के दौरान कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे:
प्रातः काल मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 06:11 AM से 10:42 AM तक
अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 12:13 PM से 01:43 PM तक
अपराह्न मुहूर्त (चर): शाम 04:44 PM से 06:14 PM तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ): रात 09:14 PM से 10:43 PM तक
देर रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): रात 12:13 AM से सुबह 04:42 AM तक (26 सितंबर)
अनन्त चतुर्दशी के पर्व पर दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होगा। सार्वजनिक स्थानों और घरों में स्थापित गणपति जी की मूर्तियों का विसर्जन होगा। शास्त्रानुसार मिट्टी द्वारा निर्मित गणेश जी की मूर्तियां जो स्थापित की जाती है उसका विसर्जन होना अनिवार्य है। अतः शास्त्रानुसार गणपति जी की मूर्तियों का विसर्जन जल में ही होना चाहिए। स्वयं के घर में ही पवित्र पात्र में गंगाजल की कुछ बूंदें तथा शेष शुद्ध जल मिलाकर मूर्ति का विसर्जन करें। विसर्जन से पूर्व गणपति जी का विधिवत पूजन करें।
Ganpati Visarjan Puja and Visarjan Vidhi गणेश विसर्जन पूजा विधि: विसर्जन से पूर्व स्थापित गणपति जी की मूर्ति का विधिवत षोड़शोपचार पूजन-आरती करें। गणपतिजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास चढ़ाएं और 5 ब्राह्मण को प्रदान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद के रूप में बांट दें। इसके पश्चात गणेश जी को 21 दूर्वा इन मंत्रों के साथ चढ़ाएं।
मंत्र: ॐ वं वक्रतुण्डाय नम:
इसके बाद गणपति जी की केसरिया चंदन, अक्षत, दूर्वा अर्पित कर कपूर जलाकर उनकी पूजा और आरती करें और मूर्ति का इस मंत्र के साथ विसर्जन कर दें। अब इस पवित्र पानी को पेड़ों में चढ़ा दें। ऐसा करने से गणपति जी की कृपा सैदेव आप पर बनी रहेगी।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
