Nidhivan Mystery : शाम 7 बजे के बाद क्यों बदल जाता है निधिवन का पूरा माहौल, जानिए इसके पीछे की रहस्यमयी कथा

punjabkesari.in Wednesday, May 27, 2026 - 12:44 PM (IST)

Nidhivan Mystery : भगवान श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन को रहस्यों, भक्ति और दिव्य लीलाओं की भूमि माना जाता है। यहां मौजूद हर मंदिर, हर कुंज और हर गली अपने अंदर कोई न कोई अद्भुत कथा समेटे हुए है। लेकिन इन्हीं पवित्र स्थलों में एक जगह ऐसी भी है, जिसका नाम सुनते ही लोगों के मन में श्रद्धा के साथ-साथ रहस्य और जिज्ञासा भी जाग उठती है। हम बात कर रहे हैं निधिवन की। कहा जाता है कि वृंदावन का निधिवन कोई साधारण स्थान नहीं है। यहां शाम ढलने के बाद किसी का भी रुकना वर्जित माना जाता है। मान्यता तो यहां तक है कि शाम के बाद न सिर्फ आम लोग, बल्कि पुजारी और आसपास रहने वाले लोग भी इस स्थान के पास रुकने से बचते हैं। लेकिन क्या आप इसके पीछे के कारण के बारे में जानते हैं। माना जाता है कि इस स्थान से ऐसे कई रहस्य जुड़े हैं जिनका पता आज तक शायद ही कोई लगा पाया हो। तो आइए जानते हैं निधिवन से जुड़े रहस्यों के बारे में-

Nidhivan Mystery

निधिवन को ऐसा दिव्य और आलौकिक स्थान माना जाता है जहां मान्यताओं के अनुसार आज भी रात के समय  भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी गोपियों के संग दिव्य रास रचाते हैं। यही वजह है कि शाम ढलने के बाद इस स्थान को पूरी तरह खाली करा दिया जाता है। यहां कुछ ऐसे विशेष किस्म के पेड़ पाएं जाते है जो उस स्थान के अलावा और कहीं भी नहीं पाए जाते। प्रचलित कथाओं के अनुसार अगर रात के समय उस स्थान पर रुककर कोई उस राधा रानी और श्री कृष्ण के दिव्य रास को देखने की कोशिश करता है तो वह व्यक्ति पागल और अंधा हो जाता है। कहा जाता है कि उस व्यक्ति की हालत ऐसी हो जाती है कि वह किसी को भी कुछ बताने के लायक नहीं रहता। स्थानीय मान्यताओं और कथाओं में कहा जाता है कि जिसने भी इस रहस्य को जानने या देखने की कोशिश की, उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ा। इसलिए शाम सात बजे का बाद उस स्थान को पूरी तरह से खाली करवा कर बंद कर दिया जाता है।  

Nidhivan Mystery

इसके दूसरे रहस्य की तो देखा जाता है कि आमतौर पर जब पेड़ पौधे बढ़ते हैं तो उनकी शाखाएं ऊपर की ओर "जाती हैं, लेकिन निधिवन में बिल्कुल विपरीत स्थिति देखने को मिलती है। जी हां, निधिवन में मौजूद तुलसी के पेड़ों की शाखाएं ऊपर की ओर जाने की जगह नीचे की ओर मुड़ी हुई हैं। ये पेड़ आकार में छोटे हैं और आपस में गुंथे हुए हैं। देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो पेड़ एक दूसरे का हाथ पकड़े खड़े हो। मान्यता है कि रात के समय ये सभी पेड़ गोपियों का रूप धारण करते हैं और राधा रानी और श्री कृष्ण के संग रास रचाते हैं।  

यहां एक और अद्भुत लीला देखने को मिलती है। निधिवन के मुख्य मंदिर परिसर के भीतर ही एक रंगमहल नाम का पवित्र स्थान है। कहते हैं कि हर रात मंदिर के पुजारी यहां एक पलंग को सजाते हैं और इसके साथ वहां पीने के लिए पानी, दातुन और श्रृंगार का सामान रखते हैं। कहते हैं कि अगले दिन जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तो सजाया गया पलंग बिखरा हुआ मिलता है, दातुन इस्तेमाल किया हुआ और पानी का पात्र आधा खाली होता है साथ ही राधा रानी के लिए रखा गया शृंगार का सामान भी अस्त-व्यस्त मिलता है। भक्तों का विश्वास है कि आज भी राधा रानी और श्री कृष्ण रात्रि के समय यहां विश्राम करने के लिए आते हैं।

एक और चौंकाने वाली बात बताएं तो निधिवन के आस-पास रहने वाले लोगों के घरों में खिड़कियां नहीं बनाई जाती हैं, क्योंकि वहां के वासियों का मत है आज भी यहां शाम के समय रासलीला होती है और अगर कोई गलती से भी इस दिव्य दृश्य को देख लेता है तो उसकी आंखों की रोशनी चली जाती है और वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है, ताकि कोई भूल से भी यह दिव्य दृश्य न देख पाए, इसलिए वहां लोग घरों में खिड़कियां नहीं बनाते।

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Content Editor

Sarita Thapa

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