PMO Shift 2026: साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ तक, नए पीएमओ की पूरी जानकारी और वास्तु पर उठे सवाल
punjabkesari.in Monday, Mar 30, 2026 - 01:05 PM (IST)
Seva Teerth Vastu Analysis: ‘सेवा तीर्थ’ अब भारत का नया प्रधानमंत्री कार्यालय है। यह एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और सेवा की भावना से युक्त प्रशासनिक परिसर है, जहां से भारत के मुख्य नीतिगत निर्णय लिए जाएंगे। इसे नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत विकसित किया गया है। इसे एक अत्याधुनिक प्रशासनिक परिसर माना जा रहा है। यह परिसर वायु भवन के पास दारा शिकोह रोड पर एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1 में स्थित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2026 को ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। 1947 से लगभग 78 वर्षों तक प्रधानमंत्री का कार्यालय साउथ ब्लॉक में रहा।

‘सेवा तीर्थ’ का नाम पहले ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ था, जिसे 2 दिसंबर 2025 को बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया। इसका नाम “नागरिक देवो भवः” की भावना पर आधारित है। यह परिसर लगभग 2.26 लाख वर्ग फीट (करीब 5 एकड़) क्षेत्र में फैला हुआ है।
‘सेवा तीर्थ’ केवल प्रधानमंत्री कार्यालय नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा प्रशासनिक परिसर है, जिसमें निम्नलिखित कार्यालय शामिल हैं-
सेवा तीर्थ 1 - प्रधानमंत्री कार्यालय
सेवा तीर्थ 2 - कैबिनेट सचिवालय
सेवा तीर्थ 3 - राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (छै।) कार्यालय
ये सभी कार्यालय पहले अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे। अब इन्हें एक ही स्थान पर लाया गया है, ताकि निर्णय प्रक्रिया तेज, समन्वित और प्रभावी हो सके।

इस परिसर में आधुनिक तकनीक, उन्नत सुरक्षा प्रणाली, हाई-टेक ऑफिस, पेपरलेस कार्य प्रणाली और जल संरक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही इसे नागरिकों के अनुकूल वातावरण के रूप में विकसित किया गया है।
अब वास्तु के दृष्टिकोण से ‘सेवा तीर्थ’ की बनावट को समझते हैं और यह देखते हैं कि इसका संभावित प्रभाव देश पर कैसा हो सकता है। चूंकि अब देश के महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय यहीं से लिए जाएंगे, इसलिए इसके प्रभाव राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पड़ेंगे।
बाहरी सड़कों के कारण ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स एक अनियमित (बर्फी जैसे) आकार के प्लॉट पर बना है। इसके उत्तर दिशा में दारा शिकोह रोड और मोतीलाल नेहरू मार्ग हैं, जबकि दक्षिण दिशा में कामराज रोड और टू टू रोड़ है। गूगल मैप में परिसर के भीतर प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय लगभग आयताकार रूप में निर्मित दिखाई दे रहे हैं। (अंदरूनी संरचना की जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण उसके वास्तु का विश्लेषण संभव नहीं है।)

इस कॉम्प्लेक्स के मध्य से अब्दुल गफ्फार खान मार्ग गया है। इस मार्ग के कारण यह बर्फी आकार प्लाट दो त्रिभुजाकार भागों में विभाजित हो गया है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री कार्यालय तथा दूसरी ओर कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय है। इस त्रिभुजाकार कम्पाउण्ड वाल के वास्तु का प्रभाव भी यहां निश्चित रूप से पड़ेगा। वास्तुशास्त्र के अनुसार, त्रिभुजाकार प्लॉट को शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे स्थानों पर कार्य करने वालों के बीच आपसी सामंजस्य की कमी रहती है तथा यहां कार्य करने वालों की ऊर्जा अपने वालों से निपटने में ही व्यर्थ हो जाती है। इसी आकार के कारण इन विभागों में कार्य करने वाले आपस में सहयोग नहीं करेंगे और निर्णय लेने में मतभेद की स्थितियां बनती रहेंगी। ऐसे में यहां से देश हित के लिए सही निर्णय लेने में दुविधा होगी इस कारण देश के लिए कई फैसले गलत सिद्ध होंगे।
इसी तरह त्रिभुजाकार प्लॉट पर बनी हमारी नयी त्रिभुजाकार संसद का प्रभाव हम देख ही रहे हैं। जिसका लगभग 2 साल पहले उद्घाटन हुआ, तब से लेकर अब तक इसका कोई भी सत्र सही ढंग से नहीं चल पाया है।

सेवा तीर्थ 1 जहां प्रधानमंत्री कार्यालय है उसका ईशान कोण, राष्ट्रपति भवन की ओर जाने वाली सड़क के सर्कल के कारण कट रहा है, इसलिए यहां से लिए गए निर्णयों के कारण आर्थिक समस्यायें भी उत्पन्न होंगी। इसके साथ ही दक्षिण के साथ मिलकर दक्षिण आग्नेय में बढ़ाव है, जिस कारण यहां ऐसे निर्णय होंगे जिससे राष्ट्र के यश में कमी आयेगी। सेवा तीर्थ 2 और 3 की कंपाउंड का उत्तर ईशान छंद कोण ही दबा हुआ है और उत्तर वायव्य बढ़ रहा है दूसरी ओर दक्षिण के साथ मिलकर दक्षिण नैऋत्य बढ़ रहा है, इस कारण यहां होने वाले निर्णय गलत सिद्ध होंगे। जो देश की प्रतिष्ठा को प्रभावित करेंगे।
सेवा तीर्थ की ऐसी बनावट के कारण यह तय है कि जो भी सरकार यहां होगी, उन्हें भी इस कॉम्प्लेक्स के वास्तुदोषों के कारण हमेशा ऐसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
ध्यान रहे भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार, वर्गाकार या आयताकार प्लॉट ही शुभ होते हैं। अनियमित आकार के प्लॉट अशुभ होते हैं। दुःख की बात है कि हमारे देश में ‘सेवा तीर्थ’ जैसा इतना महत्वपूर्ण कॉम्पलेक्स बनाने में हमारे प्राचीन शास्त्रों के नियमों का पालन नहीं किया गया है, जहां से देशहित के सभी महत्वपूर्ण निर्णय लिये जाने हैं।
वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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