मोरारी बापू ने खोला भारत स्वस्तिक यात्रा का आध्यात्मिक रहस्य, बोले- सब परमात्मा की कृपा से हो रहा है

punjabkesari.in Saturday, Oct 10, 2026 - 08:03 PM (IST)

Morari Bapu Bharat Swastik Yatra Secrets : मोरारी बापू ने कथा शुरू करने से पहले कहा मैं अपने व्यास पीठ को कभी बदलता नहीं था, अब मैं ही पूरे भारत में घूम रहा हूं, सब भगवान की कृपा से हो रहा है, साधक का जो स्वाभाविक स्वाभाव हो उसे बदलना मुश्किल होता है, कोई भी नया प्रयास शुरू करना मुश्किल है, सब मुझसे पूछते है अभी भी कोई इरादा है। मेरी इस यात्रा से बोधि और विरोधी सब जुड़े हुए हैं, इस यात्रा मैं किसी का त्याग काम कर रहा है, कई लोगों की प्रतीक्षा भी काम कर रही है, यह चार पीठ की यात्रा है, इस यात्रा के बारे मैं सोचता नहीं हूं पर रात को बैठ कर रो लेता हूं। मुझे हमेशा याद आता है, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते। मोरारी बापू बोले, यह भारत जोड़ो नहीं, दिल जोड़ो यात्रा है। उन्होंने कहा कि कई बार हमारा मन भी हमें अभद्र प्रदेश की यात्रा करा देता है। इसके अलावा स्वस्तिवाचन के बारे में भी बापू ने बखान किया और अगर कहा कि यह यात्रा हम रोज करेंगे। उन्होंने घोड़े की उदहारण देते हुए कहा कि जैसे घोड़ा बहुत तेज दौड़ता है उसकी तरह ही अगर चालक तेज़ हो तो मन रुपी घोड़े को भी सही तरह से चलाया जा सकता है। जब चालक ऐसा करना सीख जाता है, तो अहंकार  भी उसे पराजित नहीं कर पाता।

मोरारी बापू ने कथा में पहुंचे सभी जगद्गुरुओं को प्रणाम किया। उन्होंने कहा जो यहां हो रहा है कल्पना से परे है, यह परमात्मा की पूरी कृपा का परिणाम है। मोरारी बापू का भावुक संदेश यह भी थी कि जो तन से नहीं आ सके, वे मन और आत्मा से यात्रा में शामिल हों या फिर  टीवी के माध्यम से देख सकते हैं। मन का कोई ठिकाना नहीं, काल का कोई ठिकाना नहीं देश का कोई ठिकाना नहीं, जगत को सुख और कल्याण हो उसको देख कर स्वस्तिवचन करने आये हैँ, नींव मैं शुभ है, बाद मैं भी शुभ ही होगा,

मोरारी बापू ने राम कथा के दौरान धाम की महिमा समझाते हुए कहा कि जहां भगवान का वास होता है, वही स्थान धाम बन जाता है। भगवान श्रीराम अयोध्या में रहे, इसलिए उसे अयोध्या धाम कहा जाता है। इसी तरह पंचवटी भी भगवान राम से जुड़ा पवित्र धाम है। उन्होंने कहा कि अगर भगवान आपके हृदय में बसते हैं, तो आपका हृदय भी धाम बन सकता है। इसके बाद मोरारी बापू ने भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास का आध्यात्मिक भाव समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान राम 14 भुवनों में वास करते हैं। कथा में उन्होंने गुरु की महिमा पर भी प्रकाश डाला और बताया कि गुरु की प्रेरणा से जीवन में ज्ञान का प्रकाश आता है।

मोरारी बापू ने रामचरितमानस का उल्लेख करते हुए कहा कि आप सभी इसका पाठ करते हैं, लेकिन आज की व्यस्त जिंदगी में नियमित रूप से पाठ करना कई बार कठिन हो जाता है। उन्होंने कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि यदि कथा सुनने के लिए कुछ चीजों का त्याग करना पड़े, तो पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि जीवन के अंत में इंसान को सब कुछ छोड़कर जाना ही पड़ता है। उन्होंने साधु-संतों के सान्निध्य को भी एक बड़ी तीर्थयात्रा के समान बताया। उनके अनुसार, साधु के पास जाना अपने आप में बहुत पुण्य का कार्य है। उन्होंने 68 तीर्थों की महिमा का जिक्र करते हुए कहा कि 6 शास्त्रों का ज्ञान और 8 पतंजलि के योग की साधना यदि किसी व्यक्ति के रोम-रोम में समाई हो, तो उसका सान्निध्य भी तीर्थ के समान माना जा सकता है।

कथा के दौरान मोरारी बापू ने संध्या आरती का महत्व भी बताया। उन्होंने कहा कि भगवान को संध्या का समय बहुत प्रिय है। कथा में एक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान के जन्म के समय दिन एक महीने के समान हो गया था। तब रात्रि भगवान के पास पहुंची और उसने संध्या के समय पूजा का वरदान मांगा। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संध्या आरती की धार्मिक महत्ता को समझाया। हिंदू परंपरा में संध्या के समय दीपक जलाकर भगवान की आरती करना और उनका स्मरण करना विशेष महत्व रखता है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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