2 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है गांधी जयंती? बापू की आत्मकथा से जानें जन्मतिथि की कहानी
punjabkesari.in Friday, Oct 02, 2026 - 11:56 AM (IST)
Gandhi Jayanti 2 October Story : हर साल 2 अक्टूबर को पूरा देश और दुनिया महात्मा गांधी की जयंती मनाती है। सरकारी दफ्तरों में छुट्टी होती है और राजघाट पर प्रार्थनाएं होती हैं और जगह-जगह भाषण दिए जाते हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र इस दिन अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब गांधी जी का जन्म का समय हिंदू पंचांग के हिसाब से तय हुआ था, तो अंग्रजी केलैंडर की 2 अक्टूबर की तारीख कैसे बन गई। इस सवाल का जवाब खु बापू ने अपनी बहुचर्चित आत्मकथा सत्य के प्रयोग में दिया हैं। तो आइए जानते हैं कि बापू की जन्मतिथि से जुड़ी रोचक कथा के बारे में-
2 अक्टूबर और पंचांग का कनेक्शन: बापू ने क्या लिखा?
महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के तटीय शहर पोरबंदर में हुआ था। जब गांधीजी ने अपनी आत्मकथा लिखना शुरू किया, तो उन्होंने अपने बचपन और जन्म के पन्ने पलटते हुए लिखा कि उनका जन्म संवत् 1925 के भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी को शनिवार के दिन हुआ था। उस दौर में भारत में धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए विक्रम संवत् और हिंदू पंचांग की तिथियों का ही इस्तेमाल होता था। लेकिन जब ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजी कैलेंडर का चलन बढ़ा, तो पंचांग की उस तिथि का मिलान अंग्रेजी तारीख से किया गया। हिसाब लगाने पर पता चला कि संवत् 1925 के भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी के दिन अंग्रेजी कैलेंडर में 2 अक्टूबर 1869 की तारीख थी। बस तभी से दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड्स में 2 अक्टूबर दर्ज हो गया और इसे ही बापू का आधिकारिक जन्मदिन मान लिया गया।
क्यों 2 अक्टूबर को ही चुना गया राष्ट्रीय पर्व?
ब्रिटिश काल में पढ़ाई और वकालत के लिए विदेश जाने के कारण गांधीजी के आधिकारिक कागजातों में '2 अक्टूबर 1869' ही दर्ज रही।
भारत की आजादी के आंदोलन के दौरान 2 अक्टूबर की तारीख पूरे देश के लिए बापू के प्रति सम्मान प्रकट करने का माध्यम बन गई।
गांधीजी के विचार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थे। दुनिया भर में बापू की सीख को पहुंचाने के लिए अंग्रेजी तारीख 2 अक्टूबर ही सबसे सहज और सुलभ माध्यम बनी।
बापू की सत्यवादिता की मिसाल
गांधीजी की आत्मकथा का यह पन्ना हमें यह भी सिखाता है कि वे अपनी जड़ों से कितना जुड़े थे। उन्होंने अंग्रेजी तारीख को अपनाने के साथ-साथ अपने जन्म की पारंपरिक हिंदू तिथि का भी पूरा उल्लेख किया, ताकि कोई भ्रम न रहे। यही बापू का 'सत्य' था-वे किसी भी बात को छिपाते नहीं थे, बल्कि पूरी स्पष्टता के साथ सामने रखते थे। इसलिए, 2 अक्टूबर केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि यह बापू के सत्य, अहिंसा, त्याग और सादगी भरे जीवन को याद करने और उसे अपने जीवन में उतारने का दिन है।

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