मोक्षदा एकादशी 2019: पितरों के लिए मोक्ष के द्वार खोलता है ये व्रत

12/8/2019 11:51:02 AM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदायिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। कहते हैं कि जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं, उनके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोक्षदा एकादशी का धार्मिक महत्व पितरों को मोक्ष दिलाने वाली एकादशी के रूप में भी है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्रती के साथ ही उसके पितरों के लिए भी मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। बता दें कि इस बार मोक्षदायिनी एकादशी 08 दिसंबर यानि कि आज मनाई जा रही है। उसके साथ ही आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज के दिन यानि मोक्षदा एकादशी पर ही भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। जो लोग इस दिन व्रत नहीं कर पाते, वे व्रत कथा जरूर पढ़े या सुनें। 
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पुरातन काल में गोकुल नगर में वैखानस नाम के राजा राज्य करते थे। एक रात उन्होंने देखा उनके पिता नरक की यातनाएं झेल रहे हैं। उन्हें अपने पिता को दर्दनाक दशा में देख कर बड़ा दुख हुआ। सुबह होते ही उन्होंने राज्य के विद्धान पंडितों को बुलाया और अपने पिता की मुक्ति का मार्ग पूछा। उनमें से एक पंडित ने कहा आपकी समस्या का निवारण भूत और भविष्य के ज्ञाता पर्वत नाम के पंहुचे हुए महात्मा ही कर सकते हैं। अत आप उनकी शरण में जाएं। 
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राजा पर्वत महात्मा के आश्रम में गए और उनसे अपने पिता की मुक्ति का मार्ग पूछा, "महात्मा ने उन्हें बताया की उनके पिता ने अपने पूर्व जन्म में एक पाप किया था। जिस का पाप वह नर्क में भोग रहे हैं।"

राजा ने कहा," कृपया उनकी मुक्ति का मार्ग बताएं।"

महात्मा बोले," मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है। उस एकादशी का आप उपवास करें। एकादशी के पुण्य के प्रभाव से ही आपके पिता को मुक्ति मिलेगी।" 
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राजा ने महात्मा के कहे अनुसार व्रत किया उस पुण्य के प्रभाव से राजा के पिता को मुक्ति मिल गई और वह स्वर्ग में जाते हुए अपने पुत्र से बोले, "हे पुत्र! तुम्हारा कल्याण हों, यह कहकर वे स्वर्ग चले गए।"


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