Matangi Jayanti 2026: वाकसिद्धि के लिए आज का दिन है खास, ऐसे करें तंत्र की सरस्वती की साधना
punjabkesari.in Monday, Apr 20, 2026 - 10:01 AM (IST)
Matangi Jayanti 2026: तंत्र शास्त्र में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिनमें से नौवीं महाविद्या मां मातंगी हैं। शास्त्रों में मां मातंगी को ज्ञान, कला, संगीत और मधुर वाणी की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मातंगी जयंती का पर्व मनाया जाता है। कहते हैं कि इस रोज मां मातंगी का प्राकट्य हुआ था। जो साधक सच्ची श्रद्धा से मां मातंगी की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में कभी भी किसी भी तरह के अभाव का सामना नहीं करना पड़ता।

Who is Goddess Matangi? कौन हैं देवी मातंगी?
देवी मातंगी को 'तंत्र की सरस्वती' भी कहा जाता है। ग्रंथों के अनुसार मतंग भगवान शिव का एक नाम है इनकी आदिशक्ति देवी मातंगी हैं। इनका स्वरूप अत्यंत दिव्य है। वे गहरे हरे रंग की आभा वाली हैं और मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करती हैं। मां मातंगी की साधना से न केवल कला और संगीत के क्षेत्र में सफलता मिलती है, बल्कि साधक को वाकसिद्धि (वाणी पर नियंत्रण और प्रभाव) भी प्राप्त होता है।
राक्षसों का नाश करने के लिए माता मातंगी ने विशिष्ट तेजस्वी स्वरूप धारण किया है। मां का यही रूप मातंगी रूप में अवतरित हुआ। देवी मातंगी लाल रंग के वस्त्र धारण करती हैं, सिंह की सवारी करती हैं और लाल पादुका, और लाल ही माला धारण करती है। इन्होंने हाथों में धनुषबाण, शंख, पाश, कतार, छत्र , त्रिशूल, अक्षमाला, शक्ति आदि धारण हैं।
वाग्देवी मातंगी की भुजाएं चार वेद हैं। मां मातंगी वैदिकों की सरस्वती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवी मातंगी की पलास और मल्लिका पुष्पों से युक्त बेलपत्रों की पूजा करने से जातक के अंदर आकर्षण और स्तम्भन शक्ति का विकास होता है।
Significance of Matangi Jayanti मातंगी जयंती का महत्व
मां मातंगी की उपासना करने से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। विशेष रूप से वे लोग जो संगीत, लेखन, गायन या किसी भी रचनात्मक कार्य से जुड़े हैं, उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी है। मां मातंगी को "उच्छिष्ट चांडालिनी" भी कहा जाता है, क्योंकि वे भक्ति के भाव को देखती हैं, बाहरी शुद्धता के कठोर नियमों से परे वे अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

Maa Matangi Puja Vidhi मातंगी जयंती पर पूजा विधि
प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान पर मां मातंगी की प्रतिमा या यंत्र स्थापित करें।
मां को लाल फूल, अक्षत, धूप, और दीप अर्पित करें।
मां मातंगी को तंत्र की सरस्वती माना जाता है इसलिए उन्हें सफेद या पीले रंग की मिठाइयों का भोग लगाएं।
Maa Matangi Mantra मां मातंगी मंत्र
अंत में इस मंत्र का जाप करें, ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
मातंगी जयंती आत्मिक शुद्धि और बौद्धिक विकास का पर्व है। यदि आप अपनी वाणी में मधुरता और जीवन में कलात्मक ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं तो आज के दिन मां मातंगी का आशीर्वाद लेना न भूलें।

