Masik Krishna Janmashtami 2026: कल मनाई जाएगी मासिक जन्माष्टमी, जानें व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

punjabkesari.in Wednesday, Apr 08, 2026 - 09:49 AM (IST)

Masik Krishna Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण की उपासना का विशेष महत्व है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह व्रत भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। वैशाख माह में आने वाली यह तिथि विशेष रूप से सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।

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Masik Krishna Janmashtami 2026 date कब है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत?
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि की शुरुआत 9 अप्रैल को रात्रि 9 बजकर 19 मिनट पर होगी, जबकि इसका समापन 10 अप्रैल को प्रातः 11 बजकर 15 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार यह व्रत 9 अप्रैल को ही रखा जाएगा।

Masik Janmashtami muhurat मासिक कृष्ण जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जो व्रत को और अधिक फलदायी बनाते हैं—
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:38 बजे से 05:26 बजे तक
अमृत काल: सुबह 06:07 बजे से 07:54 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:53 बजे तक

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Masik Krishna Janmashtami Puja Vidhi मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर या पूजा स्थल को शुद्ध कर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं और पीले वस्त्र अर्पित करें। इसके साथ ही फूल, तुलसी दल और माखन-मिश्री का भोग लगाएं। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है। इस दौरान भजन-कीर्तन करें और अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें। व्रत का पारण अगले दिन अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद किया जाता है।

Masik Krishna Janmashtami

Significance of Masik Krishna Janmashtami Fast मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का महत्व
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। मान्यता है कि यह व्रत सभी पापों का नाश करता है और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्रदान करता है।

संतान सुख, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए भी यह व्रत अत्यंत प्रभावी माना गया है। नियमित रूप से यह व्रत रखने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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