Ashadha Month 2026 Festivals: गुप्त नवरात्रि से चातुर्मास तक, जानें आषाढ़ मास के सभी शुभ मुहूर्त और व्रत-त्योहार
punjabkesari.in Thursday, Jul 02, 2026 - 02:39 PM (IST)
Ashadha Month 2026 Festivals: हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष ऋतु के आगमन के साथ ही आषाढ़ मास का पावन प्रारंभ हो चुका है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम माना जाता है। इस पूरे माह में भगवान विष्णु, महादेव और गुरु की विशेष उपासना की जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस महीने कई बड़े धार्मिक आयोजन होने जा रहे हैं, जो साधकों के लिए पुण्य फलदायी रहेंगे।

योगिनी एकादशी: निर्जला एकादशी और देवशयनी एकादशी के बीच पड़ने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। जो 10 जुलाई के दिन पड़ रही है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन एकादशी का व्रत रखना, भगवान विष्णु की कथा सुनना और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से मन की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

प्रदोष व्रत: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व है। हर महीने दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं। एक शुक्ल पक्ष के समय और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय। प्रदोष व्रत को त्रयोदशी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूरे विधि-विधान से पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साधक को सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आषाढ़ माह में 2 रवि प्रदोष आएंगे। जो 12 जुलाई और 26 जुलाई को आएंगे।
आषाढ़ अमावस्या: 14 जुलाई आषाढ़ अमावस्या पितृ तर्पण और दान के लिए शुभ मानी जाती है। आषाढ़ माह की अमावस्या को हल हारिणी अमावस्या और आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि: इस वर्ष 15 जुलाई से साधना का विशेष समय गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। गुप्त नवरात्रि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तक मनाई जाती है। इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना करने का विधान है। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। साथ ही विशेष कार्यों में सिद्धि पाने के लिए व्रत- उपवास भी रखा जाता है।

भगवान जगन्नाथ रथयात्रा: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि यानी 16 जुलाई को विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाएगी। भारतीय जनमानस की भक्ति के प्राणाधार श्री कृष्ण का सबसे दयालु स्वरूप भगवान जगन्नाथ है। भगवान जगन्नाथ अर्थात भक्त के नाथ, जगत के नाथ दयालु भगवान। इस स्वरूप में विशाल नेत्रों के साथ बांहें पसारे भगवान जगन्नाथ भक्त को अपने आलिंगन में लेने के लिए उसे पुकार रहे हैं। भगवान जगन्नाथ रथयात्राओं के आयोजन का वास्तविक अर्थ भक्त एवं भगवान का मिलन है। जिसे देश-विदेशों में अंतर्राष्ट्रीय श्री कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) तहेदिल से निभा रहा है।

चातुर्मास और देवशयनी एकादशी: 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है, जिसके साथ ही भगवान श्रीहरि विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे। इस दिन से सभी मांगलिक और शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। पुराणों में वर्णित है, भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक पाताल लोक में बलि के महल में निवास करते हैं। 25 जुलाई से आरंभ हुआ चातुर्मास 20 नवंबर तक चलेगा।
गुरु पूर्णिमा: गुरु पूजन का महापर्व महीने के अंत में 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। महर्षि वेद व्यास जी का जन्म दिवस गुरु पूर्णिमा के रूप में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। आध्यात्मिक जगत में गुरु पूर्णिमा का विशिष्ट स्थान है। यह पर्व आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को बड़े उल्लास एवं उत्साह से मनाया जाता है। इसी दिन गुरुओं के गुरु संत शिरोमणि महर्षि वेद व्यास जी का अवतरण हुआ था। इसी कारण गुरु पूर्णिमा को ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है।
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