Makar Sankranti 2026 Festival: मकर संक्रांति और खिचड़ी का गहरा संबंध, जानें परंपरा के पीछे की मान्यता
punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 10:17 AM (IST)
Khichdi on Makar Sankranti: मकर संक्रांति 2026 का नाम आते ही लोगों के मन में सबसे पहले खिचड़ी का स्मरण होता है। उत्तर भारत में मकर संक्रांति को कई स्थानों पर खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा केवल स्वाद या मौसम से जुड़ी नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक, ज्योतिषीय और सामाजिक मान्यताएं छिपी हैं। आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों बनाई जाती है और इसका क्या महत्व है।

Makar Sankranti 2026 Kab Hai मकर संक्रांति 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष माघ माह में जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।

मकर संक्रांति 2026 की तिथि: 14 जनवरी 2026
इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करेंगे। इस कारण इसे सूर्य उत्तरायण की शुरुआत भी माना जाता है।
इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।

मकर संक्रांति को खिचड़ी क्यों कहा जाता है?
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घर-घर में खिचड़ी बनाई जाती है और गरीबों व जरूरतमंदों को इसका दान भी किया जाता है। खिचड़ी साधारण भोजन होते हुए भी सात्विक, पोषक और पवित्र मानी जाती है। यही कारण है कि यह पर्व और खिचड़ी एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़ गए हैं।

खिचड़ी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। खिचड़ी में प्रयोग होने वाले तत्व
चावल (अन्न का प्रतीक) दाल (शक्ति और पोषण का प्रतीक) घी (शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक)
इन तीनों को मिलाकर बना भोजन भगवान को अर्पित करने के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। शास्त्रों में सात्विक भोजन को सूर्य देव को समर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है।

खिचड़ी का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति पर सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश एक शुभ ग्रह परिवर्तन माना जाता है। यह परिवर्तन जीवन में स्थिरता, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी का दान करने से सूर्य और शनि दोनों की कृपा प्राप्त होती है। ग्रह दोष, विशेषकर शनि दोष और सूर्य दोष, कम होते हैं। घर में सुख-समृद्धि और अन्न-धन की कभी कमी नहीं रहती।
सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ा महत्व
मकर संक्रांति शीत ऋतु के अंत का संकेत देती है। खिचड़ी गरम, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन है, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। यही कारण है कि यह भोजन मौसम के अनुसार भी अत्यंत उपयुक्त माना गया है। साथ ही, खिचड़ी दान की परंपरा समाज में समानता, सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करती है।
Makar Sankranti 2026: परंपरा और आस्था का संगम
मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, ज्योतिष और सामाजिक चेतना का सुंदर संगम है। यह पर्व सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और जीवन में नई ऊर्जा के स्वागत का संदेश देता है।

