Makar Sankranti: श्री राम ने भी किया था इस स्तुति का जाप, आप भी गुणगान कर ऐसे पाएं लाभ

2020-01-14T11:42:14.53

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Makar Sankranti: हिंदू धर्म में नवग्रहों को भी देव का दर्जा दिया गया है। जिनमें से सूर्य देव को सभी का राजा कहा जाता है। तो वहीं शास्त्रों में सूर्य भगवान को संपूर्ण जगत की आत्मा कहकर संबोधित किया जाता है। ऋग्वेद के देवताओं के सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है। इसके अलावा भारतीय ज्योतिष में सूर्य ग्रह को आत्मा का कारक माना जाता है।  उत्तराषाढ़ा, उत्तराफ़ाल्गुनी तथा कृतिका सूर्य से संबंधित नक्षत्र माने जाते हैं। यह भचक्र की पांचवीं राशि सिंह के स्वामी हैं। अब इन सब बातों से आप जान चुके होंगे कि सूर्य देव हिंदू धर्म के कितने प्रमुख देवताओं में शामिल हैं, और इसमें इनका कितना महत्व है। पंचांग मतभेद के अनुसार देश के कुछ हिस्सों में आज 14 जनवरी, 2020 तो कुछ में कल यानि 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य राशि परिवर्तन करते हैं जिस कारण दिन इस दिन को सूर्य उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है।
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बताया जाता है धरती के प्रत्यक्ष भगवान सूर्य नारायण की मकर संक्रांति के दिन विशे। रूप से पूजा करने का विधान है। वैसे तो हिंदू धर्म में सूर्य देव को नियमित अर्घ्य देने का विधान है। पंरतु खासतौर पर इस दिन प्रातः किया गंगा स्नान व सूर्य देव को दिया जल अर्घ्य मनुष्य के जीवन में सफलता, शांति तथा सुख समृद्धि लाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन समय में अन्य देवी-देवता भी सूर्य देव की पूजा करते थे जिसमें श्री राम भी शामिल थे। श्री राम नियमित रूप सूर्य देव की आराधना करते थे। आज हम आपको मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चंद्र द्वारा की जाने वाली ऐसी ही स्तुति के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका वे प्रत्येक मकर संक्रांति पर जाप करते थे। तो अगर आप भी सूर्य देव को इस खास मौके पर खुश करना चाहते हैं तो इस स्तुति का जाप करके इन्हें करें प्रसन्न।
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जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।
त्रिभुवन - तिमिर - निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

सुर - मुनि - भूसुर - वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

सकल - सुकर्म - प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।
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नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

स्तुति का जाप करने के बाद ज़रूर करें सूर्य देव की इस आरती का गुणगान-

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

सारथी अरूण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटी किरण पसारे। तुम हो देव महान।। ॐ जय सूर्य…

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।। ॐ जय सूर्य…

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधुली बेला में हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।। ॐ जय सूर्य…
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देव दनुज नर नारी ऋषी मुनी वर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्त्रोत ये मंगलकारी , इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।। ॐ जय सूर्य…

तुम हो त्रिकाल रचियता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल बृद्धि और ज्ञान।। ॐ जय सूर्य……

भूचर जल चर खेचर, सब के हो प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद पुराण बखाने धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्व शक्तिमान।। ॐ जय सूर्य…

पूजन करती दिशाएं पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशमान।।
ॐ जय सूर्य…ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत के नेत्र रूवरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान ॐ जय सूर्य भगवान।।


Jyoti

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