Mahakal Mahotsav Ujjain : महाकाल महोत्सव में बनेगा इतिहास, दिखेगा सोमनाथ महोत्सव जैसा भव्य स्वरूप, 12 ज्योतिर्लिंग होंगे केंद्र में
punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 11:00 AM (IST)
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Mahakal Mahotsav Ujjain : विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में पर्व और उत्सव हमेशा भव्य रूप में मनाए जाते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महाकाल लोक में 14 से 18 जनवरी तक पांच दिवसीय श्री महाकाल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव साधारण नहीं, बल्कि सोमनाथ महोत्सव की तर्ज पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश और विदेश के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। इस विशेष आयोजन में देश के सात राज्यों के मुख्यमंत्री और विभिन्न ज्योतिर्लिंग मंदिरों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।
मुख्यमंत्री करेंगे महोत्सव का शुभारंभ
जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के अनुसार, श्री महाकाल महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। यह आयोजन शिव भक्ति, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को समर्पित रहेगा। महोत्सव के पहले दिन यानी 14 जनवरी से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। उद्घाटन दिवस की शाम 7 बजे महाकाल महालोक में प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन अपने दोनों पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम के साथ “शिवोहम” की विशेष संगीतमय प्रस्तुति देंगे, जो दर्शकों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव होगा।
अगले दिनों में होंगे ये खास आयोजन
महोत्सव को और खास बनाने के लिए 15 जनवरी को मुंबई की चर्चित टीम द ग्रेट इंडियन क्वायर शिव भक्ति पर आधारित संगीतमय प्रस्तुति देगी। 16 जनवरी को लोकप्रिय पार्श्व गायिका सोना महापात्रा शाम 7 बजे महाकाल लोक में मंच संभालेंगी। 17 जनवरी को इंदौर के श्रेयस शुक्ला एवं बैंड और मुंबई के विपिन अनेजा एवं बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति दी जाएगी। वहीं, 18 जनवरी को इंडोनेशिया के कोकोरदा पुत्रा और श्रीलंका के अरियारन्ने कालूराच्ची द्वारा प्रस्तुत शिव-केंद्रित नृत्य नाट्य के साथ महोत्सव का समापन होगा।
जनजातीय संस्कृति भी बनेगी आकर्षण का केंद्र
इस महोत्सव में मध्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय विरासत को भी मंच मिलेगा। 14 जनवरी को छिंदवाड़ा की भारिया जनजाति का भडम नृत्य, बैतूल की गोंड जनजाति का ठाट्या नृत्य, हरदा का काठी नृत्य, धार का भील भगोरिया नृत्य और उज्जैन की कला माच शिव बारात (माच शैली) प्रस्तुत की जाएगी। 15 जनवरी को “शिव तत्व और महाकाल: इतिहास, साहित्य और संस्कृति के संदर्भ में” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी। इसी दिन डिंडोरी के गोंड जनजातीय गुडूमबाजा, बेगा जनजाति का करमा नृत्य, सागर का बरेदी नृत्य और धार का भील भगोरिया नृत्य भी दर्शकों को देखने को मिलेगा।
ज्योतिर्लिंगों से जुड़े राज्यों की भागीदारी
वीर भारत न्यास के सचिव राम तिवारी ने बताया कि यह आयोजन सोमनाथ महोत्सव की परंपरा पर आधारित है। देश में जहां-जहां ज्योतिर्लिंग स्थित हैं, उन सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रमुख मंदिरों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। इस महोत्सव का उद्देश्य शिव भक्तों को एक मंच पर एकत्र करना और सनातन संस्कृति के संरक्षण व प्रचार को नई दिशा देना है।
