Lohri 2021: इस दिन को लेकर है कुछ खास मान्यताएं, जानें क्या ?

2021-01-12T15:47:33.587

लोहड़ी का पर्व ज्यादातर उत्तर भारत में बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि ये मकर संक्रांति के एक दिन पहले और 13 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन को लेकर शास्त्रों में बहुत सी मान्यताएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में विस्तार से।  
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लोहड़ी पर्व के अवसर पर लोग अपने रिश्तेदारों को विशेष प्रकार की मिठाइयां जैसे कि तिल और गुड़ की बनी रेवड़ी देकर बधाई देते हैं। शाम के समय में आग जलाकर उसमें अन्न डाला जाते हैं। लोहड़ी के दिन लोग भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करके अपनी खुशी प्रकट लोहड़ी को तिलोड़ी भी कहा जाता है। यह तिल और गुड़ की रोड़ी से मिलकर बना है। 

पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुवाई और कटाई से जुड़ा एक विशेष त्योहार है। इस अवसर पर पंजाब में नई फसल की पूजा करने की परंपरा है। इसके अलावा कई हिस्सों में माना जाता है यह त्योहार पूस की आखिरी रात और माघ की पहली सुबह की कड़क ठंड को कम करने के लिए मनाया जाता है।
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लोहड़ी के इस पावन अवसर के दिन अग्नि जलाने के बाद उसमें तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली चढ़ाई जाती हैं। वहीं इसके बाद सभी लोग अग्नि के गोल-गोल चक्कर लगाते हुए सुंदरिए-मुंदरिए हो, ओ आ गई लोहड़ी वे, जैसे पारंपरिक गीत गाते हुए ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते इस पावन पर्व को उल्लास के साथ मनाते हैं।
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लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने का खास महत्व होता है। दरअसल, मुगल काल में अकबर के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब में ही रहता है। कहते हैं कि दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लड़कियों की उस वक्त रक्षा की थी जब संदल बार में लड़कियों को अमीर सौदागरों को बेचा जा रहा था। 
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वहीं एक दिन दुल्ला भट्टी ने इन्हीं अमीर सौदागरों से लड़कियों को छुड़वा कर उनकी शादी हिन्दू लड़कों से करवाई थी। और तभी से इसी तरह दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि से सम्मानित किया जाने लगा और हर साल हर लोहड़ी पर ये कहानी सुनाई जाने लगी।


Content Writer

Lata

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