Kardameshwar Mahadev Temple : काशी का रहस्यमयी कर्दमेश्वर मंदिर, जहां आंसुओं से बना पवित्र कुंड
punjabkesari.in Monday, May 04, 2026 - 02:15 PM (IST)
Kardameshwar Mahadev Temple : उत्तर प्रदेश के काशी में स्थित कर्दमेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर कंदवा गांव में स्थित है जो वाराणसी के दक्षिणी छोर पर है। मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में गढ़वाल राजाओं द्वारा किया गया था। मंदिर का नाम कर्दम ऋषि के नाम पर रखा गया है जिन्होंने इसी स्थान पर तपस्या की और एक पुत्र पाने का वरदान भगवान शिव से प्राप्त किया था। मंदिर में एक सपाट शिवलिंग है, जो कर्दम ऋषि द्वारा स्थापित किया गया था। मंदिर को काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। कंदवा गांव में स्थित होने के कारण इस मंदिर को कंदवा महादेव के नाम से जाना जाता है।
नागर स्थापत्य कला
कर्दमेश्वर महादेव मंदिर नागर स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह मंदिर पंचरथ शैली में बना है। मंदिर में एक ही चबूतरा है। जिस पर गर्भगृह, प्रदक्षिणा पथ, अंतराल, महामंडप तथा अद्र्धमंडप स्थापित हैं।
पूर्व मुखी है मंदिर
कर्दमेश्वर महादेव मंदिर पूर्व मुखी है। इस मंदिर में कर्दम ऋषि ने शिवलिंग की स्थापना की थी इसलिए इसका नाम कर्दमेश्वर पड़ा। मंदिर में एक बड़ा कुंड भी है जिसका नाम कर्दम कुंड है। मान्यता है कि इस सरोवर का निर्माण कर्दम ऋषि के आंसुओं से हुआ था। ऐतिहासिक साक्ष्यों की बात करें तो कुंड का निर्माण बंगाल की रानी भवानी ने 18वीं शताब्दी में कराया था।
पंचकोसी यात्रा का पहला पड़ाव
यह दिव्य स्थल कर्दम ऋषि की तपोस्थली है। बनारस की प्रसिद्ध पंचकोसी यात्रा के पथ का यह पहला पड़ाव है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर हिन्दू देवताओं की रेवती, बलराम, ब्रह्मा, विष्णु, नटेश शिव, महिषासुर मर्दिनी, उमा माहेश्वर, नाग-नागी, गजांतक शिव, दशावतार पट्ट आदि कई बेहद सुंदर मूर्तियां उत्कीर्ण हैं। मान्यता है कि कर्दमेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से मनुष्य देव ऋण से मुक्त हो जाता है।
कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने जब रावण का वध किया तो उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगा। लंका विजय के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे तो गुरु वशिष्ठ ने उन्हें माता सीता के साथ जाकर कर्दमेश्वर महादेव के दर्शन करने को कहा। भगवान यहां आए और बाबा का दर्शन किए। उसके बाद माता सीता के साथ यहां की परिक्रमा की। तब जाकर उन्हें ब्रह्म हत्या के दोष से छुटकारा मिला।

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