Kamada Ekadashi 2026 : कामदा एकादशी पर मां लक्ष्मी के ये मंत्र बदल देंगे किस्मत, धन-धान्य से भर जाएगा घर

punjabkesari.in Saturday, Mar 28, 2026 - 02:16 PM (IST)

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Kamada Ekadashi 2026 : हिंदू धर्म में कामदा एकादशी का विशेष महत्व है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कामदा' यानी सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली। साल 2026 में यह एकादशी आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य लाने का एक सुनहरा अवसर लेकर आ रही है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की आराधना करने से दरिद्रता का नाश होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है। आइए, विस्तार से जानते हैं कामदा एकादशी 2026 के मुहूर्त, पूजन विधि और उन चमत्कारी मंत्रों के बारे में जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं।

Kamada Ekadashi 2026

कामदा एकादशी 2026

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। यह हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी भी होती है इसलिए इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

तिथि: 29 मार्च, 2026 (रविवार)

एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 मार्च 2026 को दोपहर से।
एकादशी तिथि समाप्त: 29 मार्च 2026 की शाम तक।

Kamada Ekadashi 2026

माता लक्ष्मी के सिद्ध मंत्र
कामदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है यदि आप मां लक्ष्मी का आह्वान न करें। यहाँ कुछ विशेष मंत्र दिए गए हैं जिन्हें राशि और आवश्यकता के अनुसार जपा जा सकता है:

आर्थिक तंगी दूर करने हेतु (लक्ष्मी गायत्री मंत्र)
यदि आप लंबे समय से कर्ज या धन की कमी से जूझ रहे हैं, तो इस मंत्र का 108 बार जाप करें:

"ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।"

सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए (बीज मंत्र)
यह मंत्र मां लक्ष्मी को अति प्रिय है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है:

"ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।"

अटके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए
"ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः।"

Kamada Ekadashi 2026

कामदा एकादशी पूजन विधि- कैसे प्रसन्न करें लक्ष्मी-नारायण को ?

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी या घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
संकल्प: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।
अभिषेक: दक्षिणवर्ती शंख में दूध और गंगाजल भरकर भगवान का अभिषेक करें।
शृंगार: माता लक्ष्मी को लाल चुनरी, श्रृंगार सामग्री और कमल का फूल अर्पित करें।
भोग: केसर युक्त खीर या पीले फलों का भोग लगाएं। याद रखें, तुलसी दल केवल भगवान विष्णु के भोग में रखें। 


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Content Editor

Prachi Sharma

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