कालाष्टमी: आज से लेकर लगातार 40 दिनों तक करें ये काम और फिर देंखे चमत्कार

2019-12-19T12:32:13.697

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हिंदू पंचांग के अनुसार आज 19 दिसंबर पौष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कालाष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव के भैरव रूप की पूजा की जाती है। बता दें कि ये शिव का पांचवां अवतार है। इनके दो रूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है तो वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक है। बहुत से लोग इस दिन व्रत करते हैं और भैरव बाबा की कृपा को पा सकते हैं। कहते हैं कि काल भी इनसे भयभीत रहता है इसलिए इन्हें काल भैरव एवं हाथ में त्रिशूल, तलवार और डंडा होने के कारण इन्हें दंडपाणि भी कहा जाता है। आज हम आपको कालाष्टमी के दिन किए जाने वाले कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे करने से हर बाधा से आप दूर हो सकते हैं। 
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कालाष्टमी के दिन भगवान शिव की पूजा करने से भी भगवान भैरव का आशीर्वाद मिलता है, क्योंकि भगवान भैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के अंश के रूप में हुई थी। कालाष्टमी के दिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से 'ॐ नम: शिवाय' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं और शुद्ध जल अपर्पण करें। इस विधि से पूजन करने पर भगवान भैरव प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव के मंदिर में जाकर सिंदूर, सरसों का तेल, नारियल, चना, चिरौंजी, पुए और जलेबी चढ़ाकर भक्ति भाव से पूजन करें।
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काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए कालाष्टमी के दिन से भैरव की प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और श्रीकालभैरवाष्टकम का पाठ करें। मनोकामना पूर्ण होने तक प्रतिदिन इस उपाय को भक्ति भाव के साथ करें। 
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कालाष्टमी के दिन से लेकर 40 दिनों तक लगातार काल भैरव का दर्शन करें। इस उपाय को करने से भगवान भैरव प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामना को पूर्ण करेंगे। 


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