Kajari Teej vrat katha: कजरी तीज पर पढ़ें यह कथा रिश्तों को मिलेगी नई शुरुआत

punjabkesari.in Tuesday, Aug 12, 2025 - 07:27 AM (IST)

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Kajari Teej vrat katha कजरी तीज व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक ब्राह्मण रहता था जो बहुत गरीब था। उसके साथ उसकी पत्नी ब्राह्मणी भी रहती थी। इस दौरान भाद्रपद महीने की कजली तीज आई। ब्राह्मण की पत्नी ने तीज माता का व्रत किया। उसने अपने पति यानी ब्राह्मण से कहा कि उसने तीज माता का व्रत रखा है। उसे चने का सत्तू चाहिए, कहीं से ले आओ। ब्राह्मण ने ब्राह्मणी को बोला कि वो सत्तू कहां से लाएगा। इस पर ब्राह्मणी ने कहा कि उसे सत्तू चाहिए फिर चाहे वो चोरी करे या डाका डालें। लेकिन उसके लिए सत्तू लेकर आए। 

PunjabKesari Kajari Teej vrat katha

रात का समय था। ब्राह्मण घर से निकलकर साहूकार की दुकान में घुस गया। उसने साहूकार की दुकान से चने की दाल, घी, शक्कर लिया और सवा किलो तोल लिया। फिर इन सब से सत्तू बना लिया। जैसे ही वो जाने लगा वैसे ही आवाज सुनकर दुकान के सभी नौकर जाग गए। सभी जोर-जोर से चोर-चोर चिल्लाने लगे। 

PunjabKesari Kajari Teej vrat katha

इतने में ही साहूकार आया और ब्राह्मण को पकड़ लिया। ब्राह्मण ने कहा कि वो चोर नहीं है। वो एक एक गरीब ब्राह्मण है। उसकी पत्नी ने तीज माता का व्रत किया है, इसलिए सिर्फ यह सवा किलो का सत्तू बनाकर ले जाने आया था। जब साहूकार ने ब्राह्मण की तलाशी ली तो उसके पास से सत्तू के अलावा और कुछ नहीं मिला।

उधर चांद निकल गया था और ब्राह्मणी सत्तू का इंतजार कर रही थी। साहूकार ने ब्राह्मण से कहा कि आज से वो उसकी पत्नी को अपनी धर्म बहन मानेगा। उसने ब्राह्मण को सत्तू, गहने, रुपए, मेहंदी, लच्छा और बहुत सारा धन देकर दुकान से विदा कर दिया। फिर सबने मिलकर कजली माता की पूजा की। जिस तरह से ब्राह्मण के दिन सुखमय हो गए ठीक वैसे ही कजली माता की कृपा सब पर बनी रहे।

PunjabKesari Kajari Teej vrat katha


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sarita Thapa

Related News