Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर पढ़ें गणेश जी की चमत्कारी कहानी, पूरी होंगी मनोकामनाएं

punjabkesari.in Wednesday, Mar 11, 2026 - 08:37 AM (IST)

Ganesh Ji Ki Kahani (Sheetala Ashtami 2026): आज यानी 11 मार्च 2026 को देशभर में शीतला अष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त मां शीतला की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उन्हें बासी भोजन का भोग लगाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन पूजा के समय गणेश जी की कहानी पढ़ने या सुनने से व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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शीतला अष्टमी का महत्व
हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु मां शीतला की पूजा कर उन्हें ठंडे और बासी भोजन का भोग लगाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से मां शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को सुख-समृद्धि तथा आरोग्य का आशीर्वाद देती हैं।

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इस दिन भक्त शीतला माता की कथा सुनते हैं, लेकिन कई स्थानों पर पूजा के दौरान गणेश जी की कथा पढ़ना भी बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे व्रत-पूजन का संपूर्ण फल मिलता है।

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गणेश जी की कथा
धार्मिक कथा के अनुसार एक गांव में एक बहुत गरीब बुढ़िया रहती थी। उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। उसके एक बेटा और बहू थे। बुढ़िया भगवान गणेश जी की बहुत बड़ी भक्त थी और रोज उनकी पूजा किया करती थी।

एक दिन उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी उसे दर्शन दिए और बोले— “बुढ़िया मां, तू जो चाहे वरदान मांग ले।”

बुढ़िया बोली, “मुझे मांगना नहीं आता, मैं क्या मांगू?”

तब गणेश जी ने कहा, “अपने बेटे और बहू से पूछकर मांग ले।”

बुढ़िया अपने बेटे के पास गई। बेटे ने कहा, “मां, आप धन मांग लो।”

फिर बहू से पूछा तो उसने कहा, “आप अपने लिए नाती मांग लीजिए।”

बुढ़िया ने सोचा कि दोनों अपने-अपने मतलब की बात कर रहे हैं। इसके बाद उसने पड़ोसियों से सलाह ली। उन्होंने कहा, “अब तुम्हारी उम्र ज्यादा नहीं बची है, इसलिए धन या नाती की जगह आंखों की रोशनी मांग लो।”

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बुढ़िया ने मांगा यह वरदान
इसके बाद बुढ़िया फिर से गणेश जी के पास गई और बोली—
“अगर आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों की रोशनी दें, नाती-पोते दें, पूरे परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष प्रदान करें।”

यह सुनकर गणेश जी मुस्कुराए और बोले—
“बुढ़िया मां, तूने तो हमें ठग लिया। लेकिन जो तूने मांगा है, वह सब तुझे मिलेगा।”

इतना कहकर गणेश जी अंतर्धान हो गए। कुछ समय बाद बुढ़िया को वह सब कुछ प्राप्त हो गया जो उसने भगवान से मांगा था।

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कथा का संदेश
मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन गणेश जी की यह कथा पढ़ने या सुनने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और व्रत-पूजन का पूरा फल मिलता है।

अंत में भक्त प्रार्थना करते हैं—
“हे गणेश जी महाराज, जैसे आपने उस बुढ़िया मां की सभी इच्छाएं पूरी कीं, वैसे ही सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें।”

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Content Writer

Niyati Bhandari

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