Holi Bhai Dooj katha 2026: होली के दूसरे दिन क्यों मनाई जाती है भाई दूज? पढ़ें पौराणिक कथाएं
punjabkesari.in Wednesday, Mar 04, 2026 - 11:27 AM (IST)
Holi Bhai Dooj 2026: हिंदू धर्म में भाई-बहन के अटूट स्नेह और पवित्र रिश्ते को समर्पित भाई दूज का पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। अधिकांश लोग कार्तिक मास में मनाई जाने वाली भाई दूज से परिचित हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि होली के तुरंत बाद भी भाई दूज का पर्व मनाया जाता है, जिसे होली भाई दूज या भ्रातृ द्वितीया कहा जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में होली भाई दूज 5 मार्च को मनाई जाएगी। यह पर्व चैत्र मास की द्वितीया तिथि को पड़ता है और वसंत ऋतु के आगमन के साथ भाई-बहन के स्नेह को पुनः समर्पित करता है।

क्या है होली भाई दूज का धार्मिक महत्व?
भाई दूज भाई और बहन के पवित्र बंधन का प्रतीक पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तिलक करवाने से भाई के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। इसके बदले भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं और उपहार देकर स्नेह व्यक्त करते हैं।
‘यम द्वितीया’ क्यों कहलाता है यह पर्व?
भाई दूज को ‘यम द्वितीया’ भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मृत्यु के देवता यमराज इसी दिन अपनी बहन यमुना के घर गए थे। यमुना ने उनका तिलक कर आतिथ्य सत्कार किया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा और भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा और यमलोक की यातनाएं नहीं सहनी पड़ेंगी। तभी से यह परंपरा प्रचलित है।

बहन के साहस की कथा
भाई दूज से जुड़ी एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, एक भाई अपनी बहन से तिलक करवाने जा रहा था। रास्ते में उसे नदी, सांप और शेर जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा। उसने सभी से वचन दिया कि तिलक के बाद लौटकर वह स्वयं को उनके भोजन के लिए प्रस्तुत करेगा।
जब बहन को यह बात पता चली तो वह साहस और बुद्धिमत्ता से भाई के साथ जंगल गई और सभी संकटों से उसके प्राणों की रक्षा की। मान्यता है कि तभी से बहनें यह कथा सुनकर व्रत खोलती हैं।

श्रीकृष्ण और सुभद्रा से जुड़ी मान्यता
द्वापर युग की एक अन्य कथा के अनुसार, जब श्री कृष्ण ने दैत्य नरकासुर का वध किया और अपनी बहन सुभद्रा के पास पहुंचे, तब सुभद्रा ने उनका तिलक कर आरती उतारी। इसी घटना को भाई दूज की परंपरा का एक आधार माना जाता है।
कब मनाया जाता है होली भाई दूज?
धार्मिक नियमों के अनुसार, यह पर्व चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। होलिका दहन और रंगों की होली (धुलेंडी) के बाद आने वाली द्वितीया तिथि को होली भाई दूज मनाई जाती है। कई स्थानों पर यह धुलेंडी के अगले दिन या दूसरे दिन मनाया जाता है।
होली भाई दूज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के विश्वास, त्याग और सुरक्षा के वचन का प्रतीक है। 5 मार्च 2026 को मनाया जाने वाला यह पर्व एक बार फिर रिश्तों की मिठास और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर देगा।
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Content Writer
Niyati Bhandari