Jyeshtha Maas 2026 : इस बार 2 महीने का होगा ज्येष्ठ मास, जानें सही तारीख और विशेष नियम

punjabkesari.in Thursday, Apr 30, 2026 - 12:59 PM (IST)

Jyeshtha Maas 2026 : साल 2026 में कुछ ऐसा होने वाला है जो हर किसी को हैरान कर रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ का महीना 30 दिन का नहीं, बल्कि 60 दिन का होगा। ज्येष्ठ का महीना 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलने वाले है। दरअसल इस माह में अधिकमास का संयोग भी बन रहा है। जिस कारण ज्येष्ठ मास दो महीने तक रहेगा। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह को पवित्र माना गया है। क्योंकि इसी महीने में शनि देव का जन्म हुआ था और यही वो पावन मास है जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की भेंट हनुमान जी से हुई थी। सबसे पहले समझते हैं कि अधिकमास 3 साल में 1 ही बार क्यों आता है। हिंदू कैलेंडर 'चंद्र' और 'सूर्य' दोनों की गति पर चलता है। एक चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिन का। इस अंतर को मिटाने के लिए हर तीन साल में एक 'अधिक मास जुड़ता है। 2026 में ज्येष्ठ मास के साथ यही संयोग बन रहा है। तो आइए जानते हैं ज्येष्ठ माह के सही तारीख और विशेष नियम के बारे में-

Jyeshtha Maas 2026

ज्येष्ठ माह 2026 सही तारीख 
साल 2026 में ज्येष्ठ का महीना 2 मई से शुरू होगा और 29 जून 2026 तक चलेगा। इसमें 17 मई से 15 जून तक 'अधिक ज्येष्ठ मास' रहेगा। इसी कारण यह महीना कुल 58-59 दिनों का होगा। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 'ज्येष्ठा नक्षत्र' का योग बनने के कारण ही इस माह का नाम 'ज्येष्ठ' पड़ा है।

शास्त्रों में ज्येष्ठ मास की महिमा का वर्णन करते हुए स्कंद पुराण में कहा गया है- “ज्येष्ठे मासि तु यत् दानं, जलदानं विशेषतः
तेन तुष्यति देवेशो, विष्णुः सर्वफलप्रदः॥”
अर्थात, इस महीने में जल का दान करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

पद्म पुराण में कहा गया है “ज्येष्ठे स्नानं विशेषेण, सर्वपापप्रणाशनम्” अर्थात: ज्येष्ठ मास में किया गया पवित्र स्नान सभी पापों का नाश करने वाला माना गया है।
भविष्य पुराण के अनुसार इस महीने में व्रत और तप करने से मनुष्य को मोक्ष प्रदान करने वाला पुण्य प्राप्त होता है।

Jyeshtha Maas 2026

ज्येष्ठ माह के नियम
इस महीने में एक समय भोजन करना श्रेष्ठ माना गया है।
महाभारत अनुशासन पर्व में इसका उल्लेख मिलता है, जिससे शरीर निरोगी रहता है। इस पूरे महीने दिन में सोने से बचना चाहिए। यदि स्वास्थ्य कारणों से आवश्यकता हो तो विश्राम किया जा सकता है।
प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।
पेड़-पौधों को पानी देना, पक्षियों और पशुओं की सेवा करना भी इस महीने का प्रमुख धर्म है।
इस माह में जल दान का विशेष महत्व है, जैसे प्यासे लोगों को पानी पिलाना या प्याऊ लगवाना। इस महीने में घड़ा या सुराही दान करना चाहिए।

ज्येष्ठ माह में क्या नहीं करना चाहिए ?
ज्येष्ठ माह में गर्मी चरम पर रहती है, ऐसे में पानी की बर्बादी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे वरुण दोष लगने की मान्यता है।
आयुर्वेद के अनुसार इस समय शरीर में गर्मी और वात बढ़ता है, इसलिए वात बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए।
ज्यादा मसालेदार और गरिष्ठ भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए सादा भोजन अपनाएं।
इस महीने बैंगन का सेवन वर्जित माना गया है, इसे संतान के लिए अशुभ बताया गया है।
ज्येष्ठ मास में बाल कटवाना और नाखून काटना भी वर्जित माना गया है।
लहसुन और राई जैसे तीखे पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए।
मांसाहार और मदिरा का सेवन करने से बचना चाहिए, ताकि मन और शरीर शुद्ध बना रहे।

Jyeshtha Maas 2026

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Content Editor

Sarita Thapa

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