Jamai Shashthi 2026: दामाद के स्वागत में बिछती हैं पलकें, जानें क्यों खास है बंगाल का यह पारंपरिक पर्व जमाई षष्ठी

punjabkesari.in Friday, Jun 19, 2026 - 04:14 PM (IST)

Jamai Shashthi 2026: भारतीय संस्कृति में रिश्तों की मिठास और उनके सम्मान के लिए कई अनूठे पर्व मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक बेहद खास त्यौहार है 'जमाई षष्ठी', जो मुख्य रूप से बंगाली समुदाय द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व पूरी तरह से घर के दामाद यानी 'जमाई' को समर्पित है, जहां ससुराल पक्ष अपने दामाद के प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करता है।

कब है जमाई षष्ठी 2026? 
पंचांग और बांग्ला कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। साल 2026 में यह शुभ अवसर 20 जून को पड़ रहा है। इस दिन बेटियां अपने पति के साथ मायके आती हैं और पूरा परिवार एक साथ खुशियां मनाता है।

क्या है इस पर्व का महत्व और अर्थ?
'जमाई' का अर्थ होता है दामाद और 'षष्ठी' का अर्थ है चंद्र मास का छठा दिन। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व न केवल दामाद के सम्मान का प्रतीक है, बल्कि यह परिवार की सुख-समृद्धि और वंश की वृद्धि की कामना के लिए भी मनाया जाता है। आज के दौर में यह परंपरा पारिवारिक रिश्तों की नींव को और अधिक मजबूत करने का एक सुंदर जरिया बन चुकी है।

परंपरा के अनुसार जमाई षष्ठी 
जमाई षष्ठी को उत्सव के अंदाज में मनाया जाता है। इस दिन ससुराल में उत्सव जैसा माहौल होता है। सास अपनी बेटी और दामाद को विशेष रूप से आमंत्रित करती है। तिलक करके पीला धागा बांधा जाता है और स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। जो विशेष रुप से बेटी और दामाद को खिलाए जाते हैं।

स्वागत की रस्म: सास अपने दामाद के माथे पर तिलक लगाती है और उसकी कलाई पर पीला धागा बांधती है।

आरती और आशीर्वाद: दामाद की आरती उतारी जाती है और उसके सुखी जीवन के लिए आशीर्वाद दिया जाता है।

6 फलों का भोग: इस दिन दामाद को छह प्रकार के फल और विशेष व्यंजन खिलाने की परंपरा है।

मौसमी फलों की बहार: थाली में आम, लीची और अन्य मौसमी फलों के साथ-साथ बंगाली मिठाइयां और लजीज पकवान परोसे जाते हैं।

रिश्तों में आती है नई ताजगी इस खास मौके पर ससुराल पक्ष की ओर से दामाद और बेटी को नए कपड़े और आभूषण  उपहार स्वरूप दिए जाते हैं। यह त्यौहार सास और दामाद के बीच के स्नेहपूर्ण रिश्ते को एक नई पहचान देता है और आपसी सम्मान को बढ़ावा देता है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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