उज्जैन का है अपना धार्मिक महत्व, यहां होती है कालगणना

2021-06-18T18:42:20.34

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धार्मिक कथाओं के अनुसार उज्जैन को राजा महाकाल और विक्रमादित्य की नगरी कहा जाता है। जहां पर तीन गणेश जी विराजमान है चिंतामन, मंछामन और इच्छा मन।  तो वहीं इसी स्थल पर भगवान शंकर का ज्योतिर्लिंग स्थित है, साथ ही साथ दो शक्तिपीठ हरसिद्धि और गढ़कालिका एवं 84 महादेव के साथ ही यहां पर देश का एकमात्र अष्ट चिरंजीवी ओ का मंदिर है। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उज्जैन को मंगल देव की उत्पत्ति का स्थान भी कहा जाता है तथा यहीं पर नौ नारायण और सात सागर भी है। यहां पर स्थित श्मशान को तीरथ माना जाता है जिसे चक्रतीर्थ के नाम से जानते हैं। यहां पर देवी पार्वती द्वारा लगाया गया सिद्ध वट भी स्थापित है। उज्जैन में कुंभ  होने के कारण इसे सिंहस्थ  भी कहा जाता है। तो वही राजा विक्रमादित्य ने इसी स्थान पर विक्रमादित्य के कैलेंडर का प्रारंभ किया था जिस कारण भी जगह को काफी महत्व प्रसिद्धि प्राप्त है। उन्होंने इस देश को सर्वप्रथम बाद सोने की चिड़िया कहकर यहां से ही सोने के सिक्के का प्रचलन प्रारंभ किया था। महाकाव्य महाभारत ग्रंथ के अनुसार उज्जैन एक स्वर्ग है। तो आइए जानते हैं इससे जुड़ी खास बातें-

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां पर तीन काल विराजमान हैं-  महाकाल, काल भैरव, गढ़ कालिका तथा अर्ध काल भैरव। यहां के अनुसार इन तीनों की पूजा का यहां विशेष विधान है।

बताया जाता है कि उज्जैन से ही विश्व का काल निर्धारित होता है अर्थात मानक समय का केंद्र भी यहीं पर है। और यहीं से ग्रह नक्षत्रों की गणना की जाती है तथा उज्जैन से ही कर्क रेखा गुजरती है।


प्राचीन काल के अनुसार उज्जैन से ही संपूर्ण धरती का मानक समय नियुक्त होता था। धार्मिक एजेंसियों के अनुसार उज्जैन सूर्य और कर्क रेखा के ठीक नीचे है।

लोकमत है कि जब उत्तर ध्रुव की स्थिति 21 मार्च से प्राय 6 मास का दिन होने लगता है तब छह मास के 3 माह व्यतीत होने पर सूर्य दक्षिण क्षितिज से बहुत दूर हो जाता है। उस दिन सूर्य ठीक उज्जैन के ऊपर होता है। उज्जैन का अक्षांश और सूर्य की परम कांति दोनों ही 240 अंक आज पर मानी गई है। जो स्थिति पूरे पृथ्वी पर कहीं और निर्मित नहीं है।


इसके अलावा बता दे उज्जैन 23.9 अंश उत्तर अक्षांश एवं 770 देशांतर पर समुद्र की सतह से 1658 फुट की ऊंचाई पर बसा हुआ है।

वराह पुराण में महाकाल की नगरी उज्जैन को नाभि देश और महाकालेश्वर को अधिष्ठात्र कहा जाता है। बताया जाता है कि देशांतर रेखा और कर्क रेखा यही एक दूसरे को काटती है जहां यह काटती है संभवत वही महाकालेश्वर मंदिर  स्थापित है।

उज्जैन में नवग्रह मंदिर स्थापित है। कहा जाता हा यहां की वेेधशाला की स्थापना से कालगणना का मध्य बिंदु होने के सबूत प्राप्त होते हैं।


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Content Writer

Jyoti

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