Holi Colours Meaning : रंगों का त्योहार क्यों कहलाती है होली ? जानें अलग-अलग रंगों का संदेश

punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 12:28 PM (IST)

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Holi Colours Meaning : होली हिंदू परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आनंदमय पर्व है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ इसकी शुरुआत होती है और अगले दिन लोग रंगों के साथ उत्सव मनाते हैं। कहीं लोग होलिका की राख से तिलक लगाते हैं, तो बच्चे पानी और रंगों के साथ खेलकर खुशियां मनाते हैं। लाल, पीले, हरे, नीले और गुलाबी रंगों से सराबोर यह पर्व केवल भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल और विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा भी पूरे उत्साह से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।

Holi Colours Meaning

होली का संबंध राधा-कृष्ण की मधुर लीलाओं से भी जोड़ा जाता है। लोककथाओं के अनुसार बाल्यकाल में श्रीकृष्ण अपने सांवले रंग को लेकर चिंतित थे कि राधा उन्हें स्वीकार करेंगी या नहीं। तब माता यशोदा ने उन्हें राधा के पास जाकर रंग लगाने की सलाह दी। कहते हैं कि तभी से रंग लगाने की परंपरा प्रारंभ हुई। विशेष रूप से मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में यह कथा बड़े प्रेम से सुनाई जाती है और होली वहां अत्यंत उल्लास के साथ मनाई जाती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से भी होली के रंगों का विशेष महत्व बताया गया है। होलाष्टक से होलिका दहन तक का समय कुछ मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की उग्र स्थिति का काल माना जाता है। ऐसे में अलग-अलग रंगों का उपयोग ग्रहों की प्रतिकूलता को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है। रंगों को विभिन्न ग्रहों से जोड़ा जाता है, जैसे रत्नों के रंग ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

Holi Colours Meaning

हरा रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है और यह संतुलन, उन्नति तथा शांति से जुड़ा है। पीला रंग गुरु से संबंधित है, जो ज्ञान, शुभता और प्रसन्नता का द्योतक है। लाल रंग मंगल का प्रतीक है और इसे साहस, शक्ति तथा ऊर्जा से जोड़ा जाता है। गुलाबी रंग शुक्र ग्रह से जुड़ा है और प्रेम व स्नेह का प्रतिनिधित्व करता है। नारंगी रंग सूर्य से संबंधित माना जाता है, जो उत्साह और तेज का प्रतीक है। वहीं नीला रंग शनि से जुड़ा है, जो स्थिरता और विश्वास का संकेत देता है।

यह भी माना जाता है कि चैत्र मास के आरंभ में ऋतु परिवर्तन होता है, जब सर्दी समाप्त होकर गर्मी बढ़ने लगती है। इस समय संक्रामक रोगों की आशंका अधिक रहती है, इसलिए पुराने समय में प्राकृतिक रंगों का उपयोग स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी समझा जाता था। कुछ स्थानों पर पशुओं को भी रंग लगाने की परंपरा रही है।

हालांकि आजकल रासायनिक रंगों का चलन बढ़ गया है, जो त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं इसलिए परंपरागत मान्यता यही कहती है कि होली में प्राकृतिक और सुरक्षित रंगों का ही प्रयोग करना चाहिए, ताकि यह पर्व आनंद के साथ स्वास्थ्य और सकारात्मकता भी प्रदान करे।

Holi Colours Meaning


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Prachi Sharma

Related News